संविधान के भावों को रेखांकित करने वाली पुस्तक हमारा संविधान: भाव एवं रेखांकन लोकार्पित

अजय नागर


जयपुर/नई दिल्ली। भारतीय संविधान के 70वी वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में लक्ष्मीनारायण भाला “लक्खी दा” द्वारा लिखित पुस्तक हमारा संविधान: भाव एवं रेखांकन का विमोचन राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका चाणक्य वार्ता के तत्वावधान में अतिथियों द्वारा कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर सभागार में किया गया।


कार्यक्रम के संयोजक डॉ अमित जैन ने बताया कि विमोचन समारोह में भारत सरकार के संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे, वरिष्ठ चिंतक के. एन. गोविंदाचार्य, संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू एवं राज्यसभा के पूर्व महासचिव डाॅ. योगेंद्र नारायण के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।


विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भारत सरकार के संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं भारतीय सभ्यता से जुड़े जितने भी पहलू चित्रों के माध्यम से हमारे संविधान में दर्शाए गए हैं। ये संविधान निर्माताओं की भावना प्रकट करती हैं कि भारत 15 अगस्त 1947 को ही आज़ाद नही हुआ, इससे पहले भी ये राष्ट्र रहा हैं। आज़ाद होने के बाद समृद्ध राष्ट्र बनने की इसकी परिकल्पना हैं। अतीत की जो इतनी विरासत राष्ट्र के पास हैं उसको संविधान में चित्रों के द्वारा प्रस्तुत किया हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आने के बाद 19 नवम्बर 2015 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने एक आदेश निकाला कि 26 नवम्बर को संविधान का स्थापना दिवस मनाया जावे। इसके बाद से ही स्थापना दिवस मनाने लगे हैं। लेखक लक्ष्मीनारायण भाला को पुस्तक हमारा संविधान भाव एवं रेखांकन के लिए बधाई देता हूं। इसके माध्यम से पाठको को संविधान की जानकारी मिलेगी।


केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने विमोचन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के चित्रों में प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक भारतीय इतिहास का सुंदर चित्रण किया गया है, प्रथम बार लेखक द्वारा इसका परिचय सभी से कराने का कार्य करना ऐतिहासिक काम है। हमारा प्रयास है कि शीघ्र ही चित्र वाला संविधान छप कर आम लोगों तक पहुंचे।
सुप्रसिद्ध चिंतक एवं स्वदेशी जागरण के प्रणेता के. एन. गोविंदाचार्य ने संविधान में गोरक्षा से लेकर सभी प्रमुख विषय समाहित हैं। आवश्यकता केवल उसका सही उपयोग करने की है। उन्होंने वंदेमातरम् का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक मात्र गीत ही नहीं अपितु मंत्र है, जिसको समझना सभी के लिए आवश्यक है।
संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार पुस्तक में लेखक ने भारतीय संविधान में प्रकाशित हुए उलटे स्वास्तिक एवं खंडित मूर्ति के चित्रों को हटाने की मांग की है, उससे हमारे देश की आर्थिक दशा बहुत हद तक सुधरेगी क्योंकि मांगलिक चीजों का गलत चित्रांकन होना बहुत गलत है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आज के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन से देश की आर्थिक समस्याएं सुलझनी प्रारम्भ हो जाएंगी।


भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने इस अवसर पर कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए और अपने देश के संविधान के प्रति श्रद्धा भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान को पाठ्यक्रम के माध्यम से आम जन मानस तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
पुस्तक के लेखक लक्ष्मीनारायण भाला ने अपने संबोधन में कार्यक्रम के आयोजक चाणक्य वार्ता परिवार, पुस्तक के प्रकाशक नेशनल बुक ट्रस्ट एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे 2015 में डाॅ. अमित जैन द्वारा भारतीय संविधान की चित्रांकित प्रति भेंट की गई थी, जिसे देखकर मैं अभिभूत हो गया। उन्होंने कहा जब मैं संविधान पर आधारित यह पुस्तक लिख रहा था तो मुझे सपने आते थे कि मैं संविधान समिति की बैठक में मौजूद हूं और चित्रों पर चर्चा चल रही है। उन्होंने आम जन मानस तक संविधान की चित्रांकित प्रति पहुंचाने का आवाह्न किया। पुस्तक के लेखक ने आगे बताया कि संविधान निर्माताओं द्वारा नृत्य करते हुए नटराज और स्वस्तिक के दो चित्र त्रुटिवश गलत छप गए। संविधान में समाहित किए गए चित्र उससे सम्बंधित विषय के अनुसार चित्रांकित हैं। पाठक गण को पुस्तक लाभान्वित करेगी।


कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष समाजसेवी डाॅ. रिखभ चंद जैन ने कहा कि भारतीय संविधान एक विशिष्ट दस्तावेज है, जिसके अनुसार हमारे देश की शासन व्यवस्था चलती है। इसमें प्रत्येक नागरिक को इस प्रकार के अधिकार दिये गए हैं, जिसके आधार पर वह अपना सार्वभौमिक विकास कर सके। उन्होंने इस पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि संविधान के चित्रों को जानने के लिए यह पहली एवं अनूठी पुस्तक है।
चाणक्य वार्ता के सम्पादक डाॅ. अमित जैन ने पुस्तक सृजन के प्रारम्भ एवं उसकी यात्रा के बारे में सभी को बताया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यसभा के पूर्व महासचिव डाॅ. योगेंद्र नारायण ने कहा कि भारत का संविधान विश्व के अनेक संविधानों के बीच में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हमारे संविधान में चित्रों का जो रेखांकन किया गया है, उससे बहुत कम लोग परिचित हैं, इसलिए इस महत्वपूर्ण विषय पर लेखन एवं प्रकाशन करने के उपरांत यह आयोजन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संविधान को बनाने वाली समिति ने कहा था कि संविधान में उल्लेखित किए गए कार्यों को चलाने के लिए कोई सक्रिय एवं जिम्मेदार सरकार चाहिए, तभी इन अनुच्छेदों से भारत का लोकतंत्र सुरक्षित रह सकेगा। डाॅ. नारायण ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही संविधान के विषय में पढ़ाना चाहिए। इस कार्य में यह पुस्तक अपना महत्वपूर्ण योगदान देगी।


समारोह में भारतीय संविधान के हिंदी संस्करण को हाथ से लिखने वाले श्री वसंत कृष्ण वैद्य के सुपुत्र श्रीकांत वसंत वैद्य व नागपुर से पधारे वरिष्ठ अधिवक्ता एवं संविधान सचित्र छप कर मिलना चाहिए, इस कार्य के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाने वाली संविधान सतर्कता समिति के संयोजक अविनाश काले को मंचासीन अतिथियों द्वारा स्वागत, सम्मान एवं अभिनंदन किया गया।


कार्यक्रम में वरिष्ठ इस्लामिक चिंतक कैप्टन डाॅ. सिकंदर रिजवी, डाॅ. विनोद बब्बर, जयपुर से पधारे वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र राज, सी ए दीनदयाल अग्रवाल, विजय त्रिवेदी, ए. के. जालान, सोमेन पुरकायस्त, कैलाश भारद्वाज, सुरेंद्र गोयल, डाॅ. इंदू जैन, एस. पी. त्रिपाठी, आदित्य जैन, विजय गुप्ता, योगेश कुमार, डाॅ. रीमा ईरानी, योगेश शर्मा, राजीव शर्मा, अंशुल भारद्वाज, राहुल कुमार, डाॅ. भरत कुमार, धीरेंद्र मिश्र आदि विशेष रुप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया और अंत में धन्यवाद पीयूष जैन द्वारा ज्ञापित किया गया।