आवासीय विद्यालय नक्सलवाद की रोकथाम में मददगार

   
गुलाब बत्रा


जयपुर। भुखमरी गरीबी और बेरोजगारी से त्रस्त उड़ीसा के बहुचर्चित कालाहांडी इलाके के आदिवासियों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता के साथ आवासीय विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा की अलख जगाकर नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। 



नेहरू युवा केंद्र संगठन राजस्थान तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जयपुर में आयोजित 12वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम  में भाग लेने आये कालाहांडी के तीन युवाओं ने बातचीत के दौरान यह सुझाव दिया। प्रमुख समाजवादी नेता स्वर्गीय किशन पटनायक ने लोकसभा में कालाहांडी इलाके का मार्मिक चित्रण किया था।
कालाहांडी जिला मुख्यालय भवानी  पाटना के अंतर्गत आता है जहां कॉलेज अस्पताल सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध है। इसका एक ब्लॉक थुमूल रामपुर घने जंगल के बीच बसा हुआ है। वन्यजीवों के विचरण के साथ  आदिवासी पहाड़ी इलाके में बसे हुए हैं। यह इलाका संचार सुविधा से वंचित है। अन्य आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी नहीं के बराबर है। शिक्षा के अभाव मे आदिवासी समाज से अलग-थलग है। कुछ प्राथमिक स्कूल है जिनके अध्यापकों तथा विद्यार्थियों की भाषा समस्या के कारण इनका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसी सूरत में आदिवासियों के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित करके शिक्षा के माध्यम से जन जागरण की पहल की जानी चाहिए। इससे नक्सलवाद को रोकने में भी सहायता मिलेगी। इसके साथ-साथ नेहरु युवा केंद्र संगठन की ओर से समय समय पर शिविर लगाकर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाना अधिक उपयोगी होगा। इस कदम से स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।



थुमूल रामपुर इलाके में सड़क तंत्र भी विकसित नहीं है। सड़कों के अभाव में आवागमन में परेशानी होती है। वहीं नक्सली गतिविधियों के लिए तत्व भी सड़क निर्माण में बाधाएं उत्पन्न करने से बाज नहीं आते। पिछले दिनों इस इलाके के आदिवासी दानमांझी अपनी बीमार पत्नी को कंधे पर लाद कर ले जाने को मजबूर हुए और बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई।
एक तरफ आधारभूत सुविधाओं से महरुम आदिवासी जैसे तैसे जीवन यापन के लिए मजबूर हैं वहीं नक्सलियों के भय से भी आक्रांत है।