“काव्या" साहित्य, कला एवं संस्कृति के विकास के लिए समर्पित : डॉ. सिंह

दो दिवसीय समारोह का उद्घाटन और सम्मान समारोह का आगाज कल


जयपुर। साहित्य और संस्कृति के अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान 'काव्या' के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. परीक्षित सिंह ने आज यहां प्रेस से वार्ता करते हुए कहा कि हमारी संस्था भारतीय संस्कृति, भाषा, साहित्य और कलाओं के विकास के लिए समर्पित है। हमारा प्रयास है कि हिन्दी सहित राजस्थानी, उर्दू और अन्य भाषाओं का उत्कृष्ट साहित्य विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाए। उन्होंने कहा कि राजस्थानी साहित्य की समृद्ध परम्परा को विकसित करने के लिए काव्या की ओर से हरसंभव प्रयास किया जाएगा


 संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि राजस्थानी भाषा के नये लेखकों को प्रकाश में लाने और प्रतिष्ठित लेखकों से रूबरू कराने के लिए नियमित रूप से गोष्ठियों, पुस्तकों के प्रकाशन और सेमीनार आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।


डॉ. सिंह ने कहा कि जयपुर में 8 और 9 फरवरी को दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 8 फरवरी को सायं 6.30 बजे समारोह का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर 5 साहित्यकार–पत्रकारों का सम्मान भी किया जाएगा। डॉ. परीक्षित सिंह ने बताया कि भारतीय साहित्य की मूल चेतना ने विश्व स्तर पर सभी को प्रभावित किया है। इसी क्रम में 'काव्या' की ओर से अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और नई दिल्ली में भी निरन्तर कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'काव्या के मंच पर सभी प्रकार के विचारों का स्वागत किया जाएगा परन्तु सबके केन्द्र में साहित्य सृजन को ही प्रमुख रूप से महत्व दिया जाता रहेगा। उत्कृष्ट साहित्य के अनुवाद के साथ पुस्तकों का डिजिटलाइजेशन और प्रिंट दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस दिशा में कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है।