किसी की आँखों में मुस्कुरायेंगी अब कोटा की मान कँवर
 

पत्नि की याद बनी रहे, तो मरणोपरांत करवाया नेत्रदान

 

जयपुर। सुंदर, सौम्य, सुशील व अपनी मुस्कान से सभी को मन जीत लेने वाली, 45 वर्षीया,रावतभाटा रोड स्थित,सोलंकी  फार्म हाउस डॉल्फिन पूल, निवासी मान कँवर जी का गुरुवार सुबह 11 बज़े तलवंडी के निजी अस्पताल में निधन हो गया। यूँ तो हर व्यक्ति परिवार की जान होता है, पर यह जब ज्यादा दुखः देता है, जब कोई हँसता, मुस्कुराता चेहरा अचानक सभी के सामने से हमेशा के लिये चला जाये । 

 

मान कँवर की मृत्यु के बारें में जैसे ही उनके पति मनीष जी को कहा तो वह वहीं पर खूब फूट-फूट कर रोये, यही हाल उनके बाकी सभी रिश्तदारों का भी था । शोक के समय में भी मनीष जी को याद आया कि,अब थोड़ी देर बाद उनकी पत्नि को अग्नि के हवाले कर देंगे,पर इसके शरीर का अभी भी यदि कोई अंग किसी और जरूरत मंद की जिंदगी बचा सकता हो तो अभी भी उसको निकाल लिया जाये, मनीष जी की इस बात को उनके साले साहिब शम्मी कपूर और शाइन इंडिया फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य पिंकू पांचाल ने भी सुनी,तुरंत शाइन इंडिया फाउंडेशन को संपर्क किया गया,शव के अस्पताल से निकलने से पहले ही टीम वहाँ पहुँच गयी,वहीं नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया मनीष जी की छोटी बहन अनिता कपूर के सामने सम्पन्न हुई । 

 

मान कँवर जी के परिजनों का मानना था कि,अज्ञानता वश लोग उन चीज़ों को जलाकर या ,दफना कर पूरी तरह ख़त्म कर देते है,जिनसे उनको स्नेह नहीं होता है। पर परिजनों के मरणोपरांत नेत्रदान जैसा पुनीत काम करने से यह मन को कुछ सुकून पहुँचाता है । शोक में डूबे परिवारों को यह अहसास कम होता है कि,उनके बीच में से कोई सदा के लिये जा चुका है  ।

 

अनिता जी का कहना है की मान कँवर घर परिवार व रिश्तेदारों की किसी भी तरह की परेशानी को पल में दूर कर देती थी,उनके साथ थोड़ी देर बैठ जाओ तो,ऐसा कोई दुखः या परेशानी नहीं है, जो दूर न होती हो । हमने यहीं सोच कर उनका नेत्रदान करवाया है ,की यदि किसी की आँखों का अँधियारा हमारी भाभी की आँखो से दूर होता है,और उसके चेहरे पर हल्की सी भी मुस्कान आती है,तो हम समझेंगे हमारी "मानू" अभी भी जीवित है ।