कोटा में नवजात बच्चों की मौत पर उच्चतम न्यायालय ने लिया संज्ञान, गहलोत सरकार की संवेदनहीनता हुई उजागर: डाॅ. सतीश पूनियां

जयपुर। उच्चतम न्यायालय ने गहलोत सरकार को कोटा के जे.के. लोन अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत पर नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इस पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने विधानसभा के बाहर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय का नोटिस गहलोत सरकार की अकर्मण्यता को उजागर करता है। गहलोत सरकार की लापरवाही के चलते कोटा में इतने नवजात शिशुओं की मृत्यु हुई।



गौरतलब है कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने कोटा के जे.के. लोन अस्पताल पहुंचकर इस मामले पर पहल करके सरकार को चेताया था। इसके बावजूद ना तो स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत और ना ही सरकार का कोई मंत्री वहां पहुंचा। ठीक इसके विपरीत भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने पार्टी के जनप्रतिनिधियों से 50 लाख रुपये अस्पताल को दिए जाने की पहल की थी।



डाॅ. पूनियां ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के नोटिस से यह पुख्ता होता है कि गहलोत सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। कोटा में इतने बड़े पैमाने पर नवजात बच्चों की मौत हुई, उस पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है। मैं यह मानता हूं कि एक तरफ राज्यपाल अभिभाषण पर मन ही मन अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने का काम गहलोत सरकार कर रही है, अभिभाषण में सरकार की जिन अनेक उपलब्धियों, बखानों का जिक्र किया है, वो सतही तौर पर सही नहीं है। गहलोत सरकार की परफाॅर्मेंस एक-सवा साल में बेहद निराशाजनक रही है, अभिभाषण में अनेक महकमों में खास तौर पर किसान कर्जा माफी, बेरोजगारी भत्ता, कानून व्यवस्था पर चर्चा हुई, लेकिन सरकार के स्वास्थ्य मंत्री, राजस्व मंत्री सदन में अपने-अपने विभागों से जुड़े प्रश्नों का उत्तर भी ठीक तरह से नहीं दे पाये। माननीय उच्चतम न्यायालय ने आज डाॅक्टर के.के. अग्रवाल और सोशल वर्कर वी. मिश्रा दोनों की पिटीशन पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।