'राजस्थानी भाषा के क्षितिज पर स्व. मुरलीधर व्यास का नाम अमिट रहेगा' 36वीं पुण्यतिथि पर बीकानेर समाज, जयपुर द्वारा स्व. व्यास को भावांजलि


जयपुर। राजस्थानी भाषा के अमर साधक मूर्धन्य साहित्यकार स्व. मुरलीधर व्यास का नाम राजस्थानी भाषा के क्षितिज पर हमेशा चमकता रहेगा। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए उनका सपना जिस दिन पूरा होगा उसी दिन उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ये विचार रविवार को राजस्थानी की 36वीं पुण्यतिथि के अवसर पर जयपुर के महावीर होटल में बीकानेर समाज की ओर से आयोजित स्व. मुरलीधर व्यास भावांजलि कार्यक्रम में उभर कर सामने आए।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष नारायण सिंह राठौड़ 'पीथल' ने कहा कि स्मृति शेष श्री मुरलीधर जी व्यास राजस्थानी भाषा की विभिन्न विधाओं के सजग साहित्यकार थे। उन्होंने राजस्थानी भाषा को व्यापक बनाने में हमेशा साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।


जनसम्पर्क विभाग के सहायक निदेशक श्री आलोक आनन्द ने स्व. व्यास को राजस्थानी भाषा का उद्भट विद्वान बताते हुए कहा कि राजस्थानी के नये लेखक भी अपनी कलम से इस भाषा को पोषित पल्लवित कर रहे हैंइसलिए इस भाषा का भविष्य निश्चित रूप से उन्नत कहा जा सकता है।


राजस्थान समाचार पत्र सम्पादक कॉन्फ्रेंस के महासचिव आर. के. जैन ने कहा कि राजस्थानी भाषा को दिया गया उनका योगदान राजस्थानी भाषा के क्षितिज पर अमिट रहेगा। बीकानेर समाज जयपुर के अध्यक्ष श्री बी.एल.पांड्या ने कहा कि राजस्थानी भाषा का विकास तभी संभव है जब इसे हर राजस्थानी अपनी आम बोलचाल की भाषा बनाए। स्वतंत्र पत्रकार श्री श्याम शर्मा ने कहा कि राजस्थानी भाषा विश्व की सशक्त भाषाओं में से एक है। इसमें शब्द सामर्थ्य दुनिया की किसी भाषा से कम नहीं है।


राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार एवं काव्या राजस्थान के महामंत्री श्री फारूक आफरीदी ने इस मौके पर भेजे अपने संदेश में कहा कि देश के प्रसिद्ध भाषाविद् सुनीति कुमार चटर्जी ने स्व. मुरलीधर व्यास की तुलना बंगाल के महान साहित्यकार शरतचन्द्र से की थी। उनके व्यंग्य बहुत ही उच्च कोटि के थे। उनका शब्द सामर्थ्य विशद था। इस मौके पर दीपक पारीक, एडवोकेट घनश्याम व्यास, माणक चन्द बोथरा, श्रीकिशन व्यास आदि ने भी स्वर्गीय व्यास को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए नमन किया।