राष्ट्रीय एकता, अखण्ड़ता व सामाजिक समरसता के लिए कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा: राज्यपाल कलराज मिश्र

जयपुर/वाराणसी। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि गत 26 नवम्बर को पूरे देष में   70 वां संविधान दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि संविधान हमारा मार्गदर्षक है, हमारा मूल ग्रन्थ है। राज्यपाल मिश्र रविवार को उत्तर प्रदेष के वाराणसी में राष्ट्र निर्माण एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भ्रान्तियां और प्रभावकारिता विषय पर आयेाजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

 

राज्यपाल ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में राष्ट्र की मूल भावना का उल्लेख है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिये हैं। संविधान के अनुच्छेद 51 (क) में हमारे द्वारा किये जाने वाले कर्तव्यों को परिभाषित किया गया है। मौलिक अधिकार और कर्तव्य, यह दोनों ही संविधान के प्रमुख स्तम्भ हैं। मौलिक अधिकारों की तो हम बात करते हैं, लेकिन आवष्यकता है कि हम हमारे मूल कर्तव्यों को जानें, समझें और उनके अनुरूप ही अपना कार्य और व्यवहार करें। 

 

राज्यपाल मिश्र ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। इसलिए संविधान में प्रदत्त मूल कर्तव्यों को युवा आचरण में लाकर आगे बढ़ें। यदि हम सभी ने ऐसा प्रयास किया तो निश्चित  तौर पर भारत देष को आगे बढ़ाने में और स्वयं के जीवन को भी प्रोनन्त करने में यह कदम बेहतरीन साबित होगा। 

 

राज्यपाल मिश्र ने कहा कि आमजन को संविधान की जानकारी होना आवष्यक है। राष्ट्रीय एकता, अखण्ड़ता व सामाजिक समरसता के लिए कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। मैं चाहता हूं कि विष्वविद्यालयों में युवाओं को मूल कर्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए अभियान चलाया जाये। देष की युवा पीढी को मूल कर्तव्यों के बारे में बताया जाना आवष्यक है। संविधान के अनुच्छेद 51 क पर विचार - विमर्ष करने के लिए गोष्ठियां व सेमीनार आयोजित की जायें। राज्यपाल मिश्र ने कहा कि  सच्चाई एवं ईमानदारी से दायित्वों का निवर्हन करें। राष्ट्र को विष्व पटल पर विष्व गुरू के रूप में स्थापित करने में एकजुट होकर सक्रिय एवं सार्थक भूमिका निभाएँ।

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