साहित्य संस्कृति और संस्कारों से रूबरू हो युवा पीढ़ी: मुख्यमंत्री

काव्य संध्या और साहित्यकार सम्मान समारोह में वरिष्ठ पत्रकार  डॉ यश गोयल और सर्वेश भट्ट को किया सम्मानित 

 

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति और संस्कारों से रूबरू हो। इससे उनका बौद्धिक विकास तो होगा ही उन्हें देश-दुनिया और समाज की वास्तविकता भी पता चल सकेगी। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाओं से जनमानस को सही दिशा देने की क्षमता रखते हैं। राज्य सरकार पत्रकार, साहित्कार और लेखकों को सम्मान और सुविधाएं देने मेें किसी तरह की कमी नहीं रखेगी। 

 

मुख्यमंत्री शनिवार को इन्द्रलोक सभागार में काव्या फाउंडेशन, जयपुर की ओर से आयोजित काव्य संध्या और साहित्यकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी देश के भूत, भविष्य और वर्तमान का दर्पण है। साहित्य और साहित्यकारों का सम्मान हमारी परंपरा रही है। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजस्थान के साहित्यकारों और लेखकों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बजट घोषणा के अनुरूप राजस्थान लिटरेचर फेस्टिवल जल्द ही आयोजित कराएगी।

 

मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध लेखक गुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर को उद्धृत करते हुए कहा कि ’’मानवता राष्ट्रवाद से बड़ी है।’’ उनका कहना था कि मानवता ही नहीं बचेगी तो राष्ट्रवाद कहां रहेगा। देश के वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज की स्थितियों मेें हमें गुरूदेव के इन शब्दों को याद रखना चाहिए। आज देश में मानवता को भूलकर छद्म राष्ट्रवाद का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें  संविधान की मूल भावना का आदर करते हुए आपसी सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। इस काम में भी साहित्य जगत की बड़ी भूमिका है। 

 

कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री डाॅ. बीडी कल्ला ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। जितना अच्छा साहित्य होगा उतना ही अच्छा हमारा समाज होगा। उन्होंने कहा कि काव्या संस्था साहित्य व संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। ऐसी संस्थाओं के माध्यम से साहित्यकार कौमी एकता को तोड़ने वाली ताकतों को जवाब दे सकते हैं।

 

काव्या फाउंडेशन के संस्थापक डाॅ. परीक्षित सिंह ने कहा कि काव्य एक संस्कृति है। हम आज जो हैं वह अपनी संस्कृति की वजह से हैं। उन्होंने कहा कि काव्य संवाद है और धरोहर है। काव्य और कला के बिना हमारा पूर्ण विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि राजस्थान में मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में साहित्य और संस्कृति के उत्थान की दिशा में अच्छा काम हो रहा है।

 

आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन एवं कार्यक्रम के संयोजक राजीव अरोड़ा ने काव्या फाउंडेशन की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि यह संस्था देश-दुनिया के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक हालातों पर विचार-विमर्श करने के प्रमुख मंच के रूप में उभर रही है।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जस्टिस शिव कुमार शर्मा, बाल साहित्यकार गोविन्द शर्मा, लेखिका डाॅ. जेबा रशीद, पत्रकार डाॅ. यश गोयल एवं सांस्कृतिक समीक्षक सर्वेश भट्ट को काव्या सम्मान-2020 से सम्मानित किया। उन्होंने डाॅ. परीक्षित सिंह के कविता संग्रह ’परमहंस’ एवं लेखिका नंदिनी सिंह की पुस्तक ’हाऊस ऑफ  बटरफ्लाइज’ का विमोचन भी किया। 

 

इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री भजनलाल जाटव, कार्यक्रम के प्रमुख समन्वयक सेवानिवृत्त आईएएस डाॅ. सत्यनारायण सिंह सहित साहित्यकार, पत्रकार, लेखक एवं गुणीजन उपस्थित थे।

 

कार्यक्रम में साहित्यकार इकराम राजस्थानी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचना ’गीतांजलि’ के स्वरचित राजस्थानी अनुवाद ’अंजली गीतां री’ का पाठ किया। इससे पहले काव्या राजस्थान के अध्यक्ष श्री वीर सक्सेना ने स्वागत उद्बोधन दिया और महासचिव श्री फारूक आफरीदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।