केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष्मान भारत के एक हिस्से के रूप में आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र को शामिल करने को मंजूरी दी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष्मान भारत के एक हिस्से के रूप में आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र (आयुष एचडब्ल्यूसी) को शामिल करने को मंजूरी दी।


आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र के संचालन के प्रस्ताव पर वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 की पांच साल की अवधि के दौरान कुल 3399.35 करोड़ रुपये (केन्द्र सरकार 2209.58 करोड़ और राज्य सरकार 1189.77 करोड़ रुपये वहन करेगी) का खर्च आएगा। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्रों के संचालन से निम्नलिखित उद्देश्य हासिल करने होंगे:-



  • मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था के साथ मिलकर निवारक, आरोग्यकर, पुनर्सुधारक और उपशामक स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए आयुष सिद्धांतों और अभ्यासों पर आधारित एक संपूर्ण वेलनेस मॉडल बनाना।

  • आयुष सेवाएं उपलब्ध कराकर जरूरतमंद लोगों को उपचार का नया विकल्प मुहैया कराना।

  • आयुष सेवाओं में रहन-सहन, योग, औषधीय पौधों को लेकर सामुदायिक जागरूकता को शामिल करना और आयुष व्यवस्था के सामर्थ्य के अनुसार चयनित स्वास्थ्य स्थिति के लिए दवाइयों का प्रावधान करना।


आयुष मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से देश भर में 12,500 आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्रों के संचालन के लिए निम्नलिखित दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं:



  1. मौजूदा आयुष औषधालयों (लगभग 10,000) को अपग्रेड करना

  2. मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों (लगभग 2500) को अपग्रेड करना


     लाभ



  • कम खर्च पर सामान्य स्वास्थ्य कवर हासिल करने के लिए पहुंच में वृद्धि।

  • द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर बोझ में कमी।

  • ‘स्वयं-देखभाल’ मॉडल की वजह से अतिरिक्त खर्च में कटौती।

  • एसडीजी-3 को लागू करने में आयुष का एकीकरण जैसा कि नीति आयोग ने आज्ञापित किया है।

  • लक्षित क्षेत्रों में वैध संपूर्ण वेलनेस मॉडल।


 


 


आपको बता दे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में आयुष उपचार व्यवस्था (आयुर्वेद, योगा एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) की संभावनाओं को संपूर्ण देखभाल की बहुवादी व्यवस्था की मुख्यधारा में लाने की वकालत की गई है।


भारत सरकार ने फरवरी 2018 में समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मुहैया कराने के लिए मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोलने का फैसला लिया था।


इसके बाद यह भी फैसला लिया गया कि आयुष मंत्रालय कुल स्वास्थ्य उपकेंद्रों के 10 फीसदी केंद्रों को आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र के रुप में संचालित करेगा जिसकी संख्या 12,500 होगी।


इस प्रस्ताव का विज़न लोगों को स्वत: देखभाल के जरिए बीमारियों से बचने और अतिरिक्त खर्च बचाने में सक्षम बनाना और जरूरतमंद लोगों को उपचार का एक नया विकल्प मुहैया कराना है।