केन्द्रीय शुष्क कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली/जयपुर। पाली सांसद,पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिख कर राजस्थान की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में केन्द्रीय शुष्क कृषि विश्वविद्यालय स्थापना करने की मांग की है ।

  

चौधरी ने पत्र में लिखा है कि देशभर में 3 स्थानों इम्फाल, बुन्देलखण्ड ओर समस्तीपुर में वहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना की जा चुकी है। राजस्थान, भोगोलिक दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है तथा भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 10.55 प्रतिशत भू भाग है। प्रदेश का कुल फसल क्षेत्र 183.49 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 116.88 लाख हैक्टेयर (75 प्रतिशत) वर्षा आधारित है तथा शेष 66.61 लाख लाख हेक्टेयर (25 प्रतिशत) सिंचित है। जल संसाधन के क्षेत्र मे प्रदेश में केवल मात्र 1 प्रतिशत जल ही उपलब्ध है साथ ही कृषि भूमि का 10.5 प्रतिशत हिस्सा लवणीय व क्षारीय समस्या से भी ग्रसित है। यहाँ की मृदा हल्की व बालू होने के कारण भूमि में जलधारण क्षमता व कार्बनिक पदार्थ अत्यन्त कम है। इसके अतिरिक्त अनियमित वर्षा, अत्याधिक तापमान, गिरता जलस्तर आदि अनेक समस्याओं का सामना भी यहां के किसानों को करना पड़ता है। 

 

उन्होंन अवगत कराया कि कृषि के लिए विपरीत तमाम परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान का किसान अपनी मेहनत से आज रेगिस्तान में भी अनार, चीकू, अंगूर की बेहतर खेती करने लगा है। उन्नत खेती तकनीकों के साथ किसान सेवा केन्द्रों और कृषि विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में यहां का किसान बाजरा, मक्का, सोयाबीन, सरसों, लसोड़ा आदि का उत्पादन निरन्तर रूप से बढ़ रहा है। खराब मिट्टी, विषम जलवायु, पानी की कमी, खेती में शिक्षा व अनुसंधानों की कमी के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से राजस्थान में वर्ष 1995 तक होने वाली 203 तरीके की मेडिसिनल प्लांट्स (औषधीय पौधे) की खेती अब घट कर मात्र 55 ही रह गई है। इसी के साथ बढ़ते कीटनाशकों से गुणवत्ता युक्त खेती में भी गिरावट दर्ज हो रही है।

 

चौधरी ने पत्र में आग्रह किया कि यदि राजस्थानी किसान भाइयों को कृषि सम्बन्धित शिक्षा दी जाए तो वे देश को दूसरी हरित क्राांति दिला सकते है। साथ ही यह भी बताया कि आज स्वस्थ एवं पौष्टिक खान-पान की ओर पूरा विश्व बढ़ रहा है। भारतीय देशी उत्पाद जैसे बाजरा, ज्वार आदि ग्लूटेन फ्री मिलिट्स का इस्तेमाल पूरे विष्व में बढ़ने लगा है, जिसकी अधिकाशः पैदावार राजस्थान प्रदेश में ही होती है। उन्होनें  राजस्थान प्रदेष की विशेष भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों पर विशेष अनुसंधान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्री जी से राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में एक अलग से केन्द्रीय शुष्क कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग करते हुए बताया कि संसदीय क्षेत्र पाली में उपर्युक्त सरकारी भूमि के साथ-साथ बेहतर रोड़ कनेक्टीविटी व छोटे व बड़े लगभग सैकड़ों बांध उपलब्ध है। पाली में सरकारी भूमि की उपलब्धता से अवाप्ती को लेकर कोई समस्या उत्पन्न नही होगी ओर बांधो में पानी की उपलब्धता होने से जल भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। शुष्क क्षेत्र में केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थापित होने से राजस्थानी किसान भाईयों को खेत हेतु प्रतिकूल परिस्थितियों में की गई उनकी अथक मेहनत का सुखद फल मिल सकेगा।