रामगंज में कोरोना को हराने के लिए महामारी विशेषज्ञों की सलाह पर विभाग ने बनाई खास रणनीति, पूरे क्षेत्र को क्लस्टर्स में बांटकर की जाएगी सघन सैंपलिंग: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री 

 



जयपुर।
चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने बताया कि रामगंज मंे कोरोना की रोकथाम के लिए महामारी विशेषज्ञों की सलाह पर खास रणनीति बनाई गई है। इसके तहत जनगणना के अनुसार रामगंज को क्लस्टर्स में बांटकर प्रतिदिन सैंपल लिए जाएंगे और उनकी पीसीआर टेस्टिंग करवाई जाएगी। ताकि क्षेत्र में कोरोना पॉजीटिव्स की संख्या का सही आकलन हो पाए।

डॉ. शर्मा ने बताया कि महामारी विशेषज्ञों की टीम ने लगातार रामगंज के घटनाक्रम पर नजर रखते मैपिंग के अनुसार रणनीति बनाई है। उन्होंने बताया कि इसके तहत रामगंज को 30 क्लस्टर्स में बांटा गया है। प्रत्येक क्लस्टर से 21 सैंपल प्रतिदिन लिए जाएंगे। ज्यादा मामले सामने आने पर ज्यादा सैंपल भी लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि रामगंज में सोशल डिस्टेंसिंग रखना मुश्किल काम है, ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों को क्वारेंटाइन भी किया जा सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में स्क्रीनिंग का काम भी तेज किया गया है। सरकार को विश्वास है कि आने वाले दिनों में रामगंज में हालात ठीक होने लेगेेंगे।

पौने 6 करोड़ से अधिक की हुई स्क्रीनिंग
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कोरोना के पूरे देश में जितनी सतर्कता और सजगता राजस्थान ने दिखाई है, शायद ही किसी और राज्य ने दिखाई हो। राज्य का प्रशासनिक अमला, पुलिस और चिकित्सा विभाग के बेहतर तालमेल का ही परिणाम है कि राजस्थान में हालात पूरी तरह काबू में है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक पौने 6 करोड़ लोगों का सर्वे और स्क्रीनिंग हो चुकी है। यही नहीं देश मंे कोरोना की मृत्यु दर के मुकाबले प्रदेश में कोरोना से होने वाली मृत्यु दर काफी कम है।  

बेहतर उपचार और प्रबंधन से 45 हुए नेगेटिव
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि राज्य में यह सुखद है कि विभाग ने कोरोना की रोकथाम के साथ पॉजीटिव आए मरीजों पर विशेष ध्यान दिया। उन्हें सोशल डिंस्टेंसिंग के साथ आइसोलेट रखा गया। उचित उपचार और विशेष ध्यान देने से प्रदेश में अब तक 45 लोगों को पॉजीटिव से नेगेटिव किया जा चुका है। इनमें से 42 को तो डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। चिकित्सकों की मेहनत और उपचार से भीलवाड़ा में अधिकांश लोग पॉजीटिव से नेगेटिव हो चुके हैं।

हर कदम पर सरकार ने दिखाई मुस्तैदी
कोरोना को लेकर सरकार शुरू से ही सजग रही है। देश में सबसे पहले राजस्थान से लॉकडाउन की घोषणा की। प्रदेश में जहां भी पॉजीटिव मरीज मिले, उसके संपर्क में आए सभी लोगों का कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का काम व्यापक स्तर पर करवाया जा रहा है। कंटेंमेंट प्लान के तहत 1, 3 और 5 किलोमीटर के क्षेत्र में तुरंत कर्फ्यू लगाया जा रहा है। आईएलआई केसेज में ज्यादा से ज्यादा सैंपल लेकर उनकी जांचें करवाई जा रही हैं। साथ ही क्लस्टर सैंपलिंग, ड्रोन से निगरानी जैसी प्रयोग कर सरकार पूरी सजगता से काम कर रही है।

क्या है भीलवाड़ा मॉडल
यह मॉडल चिकित्सा विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अमले द्वारा किए गए बेहतर कार्य का समन्वय भर है। विदेशों के हालात को देखकर मुख्यमंत्री ने दूरदर्शिता दिखाते हुए सभी मेडिकल कॉलजों में आआरटी (रेपिड रेस्पॉन्स टीम) का गठन करवा दिया था। कोरोना पॉजीटिव की सूचना मिलते ही पहले से गठित आआरटी (रेपिड रेस्पॉन्स टीम) को तुरंत क्षेत्र में भेजा गया। क्षेत्र में 1,3 और 5 किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू और फिर महाकर्फ्यू लगाया गया। हर घर के सदस्य की 2-2, 3-3 बार स्क्रीनिंग की गई। कुछ लक्षण मिलने पर भी उन्हें तुरंत 14 दिनों के क्वारेंटाइन में भेजा गया और उन पर निगरानी रखी गई। जांच की रिपोर्ट आते ही पॉजीटिव मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया और तुरंत उपचार कर दिया। पॉजीटिव लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की सघन कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की गई और उनकी भी व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग और जांच करवाई गई। सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पल-पल की रिपोर्ट लेते रहे। अंत में उपचार के बाद जो पॉजीटिव से नेगेटिव आए उनकी भी कई बार जांच करने के बाद डिस्चार्ज किया।