राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 1 लाख 51 हज़ार 162 परिवारों तक राहत पहुंचाई
8213 स्वयंसेवकों ने मोर्चा सँभाला, कोरोना वॉरियर्स के सहयोगी बने स्वयंसेवक, एस एम एस हॉस्पिटल में उपलब्ध करवाए 5 हजार मास्क, 898 शाखाओं से हो रहे हैं सेवा व जागरण के अनेक कार्य

 


 

जयपुर। वैश्विक बीमारी कोरोना से लड़ाई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने राज्य भर में सेवा कार्य प्रारम्भ कर दिए है। संघ, स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचा रहा है। राजस्थान में कोरोना महामारी के उपजे दुष्प्रभाव के साथ सेवा कार्यों की व्यापकता एवं विविधता भी बढ़ती जा रही है। स्वयंसेवक प्रत्येक जिले में सभी स्तरों पर प्रशासन से संवाद, सहयोग व समन्वय करते हुए कई प्रकार के सेवा कार्य बिना भेदभाव के कर रहे हैं। राजस्थान के संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान में 898 शाखाओं के माध्यम से 8213 स्वयंसेवकों द्वारा 1 लाख 51 हजार 162 परिवारों की सेवा 15 मार्च से अनवरत कर रहे हैं। 

 

प्रारंभ काढ़ा पिलाना, पत्रक वितरण, सोशल मीडिया पर जन-जागरण, यातायात संचालन, लॉकडाउन पालना की अपील, पेयजल, भोजन पैकेट/ सूखी सामग्री वितरण, वृद्धजनों की देखभाल, स्वच्छता, सेनिटाइजेशन बनाकर उसका वितरण करना, मास्क निर्माण व वितरण, साबुन बाँटने जैसे अनेक कार्य स्वयंसेवक कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर  स्व: प्रेरणा से स्वयंसेवक जन सहभागिता करते हुए ट्विटर ट्रेंड पर सेवा फॉर सोसाइटी (#sev4socity) व इंडिया थैंक्स (#india Thanks) नामक ट्वीट के द्वारा कोरोना के योद्धाओं का अभिनंदन से समाज मे सकारात्मक वातावरण बनाने में भी सहयोग कर रहे हैं।

 

हाल ही में जयपुर स्थित राज्य के सबसे बडे अस्पताल में जब मास्क की कमी हुई तब सवाई मानसिंह अस्पतल में स्वयंसेवकों ने अपने परिवारों से 5000 मास्क बनाकर उपलब्ध करवाए। अब तक इन परिवारों द्वारा 87 हजार 775 मास्क बनाए गए हैं।

राजस्थान में वंचित वर्ग व घूमन्तु बस्तियों में प्रतिदिन भोजन पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। कल तक 5 लाख 43हजार 100 भोजन पैकेट वितरित किए थे। फुलेरा की शाखा-टोली बड़ी संख्या में ऐसे किट तैयार कर प्रतिदिन बांटने जाती है। वहां संघ के खंड कार्यवाह महेश कुमार का कहना है कि यह व्यवस्था करने की क्षमता में कई माह तक कोई कमी नहीं आ सकती। पूरे राजस्थान में 5 दिन से लगाकर 20 दिन तक की सूखी सामग्री के 65033 राशन सामग्री के किट वितरित किए गए हैं।

संघ के स्वयंसेवकों का ध्यान प्राणिमात्र पर भी है, पशु पक्षियों के लिए चारा-चुग्गे की व्यवस्था में भी कई स्वयंसेवकों की टोलियां लगी हुई हैं।

 

भ्रामक अफवाहों के चलते पलायन कर रहे प्रवासी श्रमिकों को समझाकर जो जहां हैं वहीं रहने के लिए भी तैयार किया गया। स्थानीय प्रशासन से वार्ता कर आबूरोड,जालोर, बाड़मेर, प्रतापगढ़, उदयपुर ग्रामीण के सायरा प्रखंड, सांगानेर, दौसा, भरतपुर आदि स्थानों पर प्रवासी श्रमिकों के भोजन की व्यवस्था के साथ-साथ उनके परिवार की संभाल भी की गई। सामाजिक दूरी (Social Distencing) के लिए राशन किराने की दुकान, सब्जी मंडी, दूध, दवा की दुकानों के बाहर एक-एक मीटर की दूरी पर रेखांकन कर नागरिकों को पंक्तिबद्ध व गोलों में खड़े होने के लिए स्वयंसेवक लगे हुए हैं। श्रमिकों के पलायन व तबलीगी जमात के देश भर में फैलाव के कारण से सामाजिक संक्रमण न फैले, इसके लिए कई स्थानों पर स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग किया जा रहा है। चिकित्सकों के नंबरों की एवं हेल्पलाइन नंबरों की सूची उपलब्ध करवाई जा रही है अजमेर व जयपुर की इकाई में सतत रक्तदान का कार्य भी चल रहा है।

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सेवा प्रमुख शिवलहरी के अनुसार, “संघ अपने प्रारंभिक काल से ही अपने सेवा कार्य सम्पूर्ण मानवता के लिए बिना भेदभाव के पीडि़तजन तक पहुंचाता रहा है, जिन्हें आपदा में सबसे अधिक आवश्यकता रहती है । चाहे वह किसी भी जाति, मत, पंथ का ही क्यों न हो ।" सेवा के पथ पर चलते हुये संघ के स्वयंसेवक एक ही शुभंकर मंत्र गुनगुनाते हैं, ‘चरैवेति-चरैवेति।