सप्त ऋषि मंडल द्वारा जन कल्याण की कामना के साथ, कोरोना विपदा निवारण यज्ञ कर मनाई परशुराम जयंती


जयपुर। सप्त ऋषि मंडल राजस्थान द्वारा  चिरंजीव भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर कोरोना वायरस से शीघ्र मुक्ति के लिये कोरोना वायरस मुक्ति यज्ञ किया गया। कोरोना वायरस मुक्ति यज्ञ में विधानसभा के मुख्य सचेतक डाक्टर महेश जोशी ने यज्ञाहुति प्रदान की। जयपुर के श्री मनसापूर्ण हनुमान धाम पर पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने महामारी से बचने के लिए यज्ञाहुति डलवाई। 


सप्त ऋषि मंडल के अध्यक्ष पंडित देवीशंकर शर्मा ने बताया कि विपदा निवारण यज्ञ एवं जन कल्याण की कामना के साथ  परशुराम जयंती मनाई गई। इस दौरान कोरोना वायरस से शीघ्र मुक्ति के लिये कोरोना वायरस मुक्ति यज्ञ किया गया। जिसमे विधानसभा के मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी ने यज्ञाहुति दी और पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के आचार्यत्त्व में आहुति डलवाई। यज्ञ में संपूर्ण ब्राह्मण समाज की और से आहुतियां दी गई और भगवान परशुराम जी की आरती करके 51 किलो प्रसाद का भोग लगाया गया। 


शर्मा ने आगे बताया कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु लॉक डाउन के चलते सप्त ऋषि मंडल के संरक्षक महंत कैलाश शर्मा ने समस्त ब्राह्मण समाज से अपील की है कि इस वर्ष घरों में रहकर ही परशुराम जयंती मनाएं। अपने अपने घरों मे रहते हुये दीप प्रज्वलन के साथ दीप उत्सव की तरह मनाये। कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व के बचाव हेतु भगवान् परशुराम जी के चित्र के सम्मुख बैठ कर असंख्य महामृत्युन्जय मंत्र का जाप करना है। भगवान परशुराम को भोग लगा कर, प्रशाद घर मे सभी को बांटे।सायंकाल दीपावली के समान दीप प्रज्वलन करके भगवान परशुराम के चित्र की आरती के बाद दीपक अपने अपने घरों के बाहर सजावे। 


सप्त ऋषि मंडल के महामंत्री कौस्तुभ दाधीच ने बताया कि भगवान परशुराम की जयंती के अवसर पर जनकल्याण एवं विपदा हरण के उद्देश्य से किये गए यज्ञ में विधानसभा के मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी, पंडित देवीशंकर शर्मा, पंडित प्रदीप गौड़, पंडित करण शर्मा, पंडित रवि शास्त्री और अन्य पदाधिकारीओ ने आहुतियाँ  प्रदान की। यज्ञ में शारीरिक दूरी भी बनाये रखी। जरूरतमंद परिवारों को राशन का भी वितरण किया जाएगा। 

 


हवन का महत्व बताते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि यज्ञ का तात्पर्य है त्याग, बलिदान, शुभ कर्म। अपने प्रिय खाद्य पदर्थों एवं मूल्यवान सुगंधित पौष्टिक द्रव्यों को अग्नि एवं वायु के माध्यम से समस्त संसार के कल्याण के लिए यज्ञ द्वारा वितरित किया गया है। हवन हुए पदार्थ वायुभूत होकर प्राणिमात्र को प्राप्त होता है। हवन मानव के स्वास्थ्यवर्धन और  रोग निवारण  में सहायक होते है।