सतीश पूनियाँ ने फ़ेसबूक लाइव से “भाजपा का इतिहास विकास और ध्येय यात्रा “ पर कार्यकर्ताओं को किया सम्बोधित
जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा.सतीश पूनियाँ ने पार्टी की संवाद शृंखला की कड़ी में फ़ेसबूक लाइव के माध्यम से हज़ारों कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया। डा. पूनियाँ ने जनसंघ की स्थापना से लेकर अब तक भाजपा के इतिहास और विकास ध्येय पर प्रकाश डाला।

 

उन्होंने कहा की जनसंघ से लेकर भाजपा की यात्रा राष्ट्रवाद की भावना के साथ चली है। जनसंघ के संस्थापक डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पहले अधिवेशन में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सिद्धांत दिया। उसके पहले महात्मा गांधी की सलाह पर वे नेहरू मंत्रिमंडल में शामिल हुए और फिर नेहरू लियाक़त समझोते के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया। देश में हुए पहले आम चुनावों में जनसंघ के तीन सांसद जीत कर आए। उस समय राजस्थान में भी लालकृष्ण आडवाणी, सुंदर सिंह भंडारी और भेरोंसिंह शेखावत जैसे नेता जनसंघ के आधार स्तंभ बने। नेहरू और शेख़ अब्दुल्ला के समझोते से अस्तित्व में आए, एक देश में दो विधान दो निशान दो प्रधान के ख़िलाफ़ जनसंघ का आंदोलन शुरू हुआ और परमिट सिस्टम को तोड़ कर कश्मीर गए डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में 23 जून 1953 को शहादत दी, पार्टी के राष्ट्रवादी विचार को पुरा करने के लिए संस्थापक अध्यक्ष शहीद हो गए। डा. मुखर्जी आज़ाद भारत के पहले राजनैतिक शहीद बने। दादरा मुक्ति, गोवा मुक्ति का आंदोलन जनसघ के नेतृत्व में चला। असम बचाओ आंदोलन, अणु बम बनाने की माँग, ताशकंद घोषणा का विरोध, ये जनसंघ की स्थापना के कुछ वर्षों बाद तक किए गए आंदोलन थे। 

 

सबसे पहले देश में 1967 में राजनीतिक परिवर्तन का दौर शुरू हुआ । पहली बार गेर कांग्रेसी सरकारें बनने को शुरुआत हुई । इसके तुरंत बाद कालीकट के अधिवेशन में एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय जनसंघ के अध्यक्ष बने और दुर्भाग्य से अगले ही वर्ष वो भी शहीद हो गए । उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी अध्यक्ष बने । 1971 में भारत पाक की लड़ाई के बाद दूसरा तासकंद नहीं होने देंगे ,इस बात की लड़ाई जनसंघ ने लड़ी । शिमला समझोते का विरोध किया ।

1972 के गुजरात नव निर्माण के आंदोलन और बिहार में समग्र क्रांति के आंदोलन में जनसंघ और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ कर भाग लिया । 25 जून 1975 को अधिनायकवादी इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया । जिसके ख़िलाफ़ जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने लड़ाई सड़कों पर संघर्ष किया । जनसंघ के नेता जेल में डाल दिए गए । कार्यकर्ताओं पर जुल्म किया गया , मुक़दमे दर्ज किए गए , लेकिन उनकी लड़ाईं के फलस्वरूप आपातकाल हटा , इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हुई , और जनता पार्टी की सरकार बनी । 6 अप्रेल 1980 को भाजपा की स्थापना हुई , 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में भाजपा को मात्र दो सीटें मिली । राजीव गांधी के बोफ़ोर्स घोटाले , शाहबानो के साथ हुए अन्याय के ख़िलाफ़ आंदोलन और राममंदिर निर्माण के लिए हुए जनआंदोलन से मिले विश्वास के दम पर 1989 के आम चुनाव में भाजपा ने शानदार सीटें जीती । 

 

डा.पूनियाँ ने कहा की उसके बाद पहली बार 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने , बहुमत नहीं होने के कारण 13 दिन में वो सरकार चली गई , लेकिन उसके बाद 1998 से लेकर 2004 तक देश में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनी , जिसने इस देश में विकास का एक नया माडल दिया । 2014 में देश की सत्ता में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई , जिसनें मज़बूत भारत के निर्माण की आधारशिला रखी , देश को विकास की रफ़्तार पर स्वावलंबन के साथ दौड़ाया । 2019 में हुए आम चुनाव में पहले से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 303 सीटों के साथ भाजपा की सरकार में वापसी हुई , इस सरकार के थोड़े से समय में नरेन्द्र मोदी की सरकार ने तीन तलाक़ , धारा 370 हटाने , राममंदिर निर्माण , नागरिकता संशोधन जैसे भाजपा के मूल मुद्दों और जनभावना के बरसो से लटके ऐतिहासिक फ़ैसलों को किया । आज एक वैश्विक महामारी के कारण देश संकट के दौर से गुजर रहा है । नरेन्द्र मोदी की सरकार बेहतर प्रबंधन के साथ इस संकट से लड़ रही है । भाजपा के हर कार्यकर्ता का मूल कर्तव्य है की वो इस समय दिन दुःखियों की मदद करे ।