बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे केशकला से जुड़े सैन समाज को आर्थिक सहायता देने की मांग को लेकर सीएम गहलोत को लिखा पत्र

जयपुर राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष एवं चूरू विधायक राजेन्द्र राठौड़ ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण व्यवसाय बंद होने से सैन समाज (सैलून कार्य वालों) को राजकीय सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मांग की है। उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विगत 55 दिन से कोविड-19 महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने हेतु लगाये गये लाॅकडाउन में 80 प्रतिशत सैलून की दुकानें केन्द्र व राज्य सरकार के निर्णयानुसार बंद है। जिससे गरीबी के रेखा से नीचे आने वाले इस कार्य से जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति अत्यंत ही दयनीय हो गई है तथा यह न तो मजदूर डायरी से जुड़े है और ना ही इन्हें बीपीएल श्रेणी की सुविधाएं मिल रही है।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि दैनिक कार्य कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले केशकला से जुड़े सैन समाज की आर्थिक दयनीय स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए बीपीएल में शामिल मानते हुए खाद्य सामग्री व 10 हजार रूपये की आर्थिक सहायता, दुकानाें के मासिक किराये में राहत व बिजली-पानी के बिल माफ किये जाने तथा गाईड लाईन अनुसार कार्य किये जाने की अनुमति दी जाएं।

निजी चिकित्सालयों के संगठन से चर्चा कर कोरोना की लड़ाई में भागीदारी सुनिश्चित करें राज्य सरकार

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दूसरे पत्र के माध्यम से कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच सरकारी के समान ही निजी चिकित्सालयों के लिए स्पष्ट एडवाइजरी जारी करने, निजी अस्पताल में कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच व रियायती दरों पर पीपीई किट उपलब्ध कराने और 10 महीने से निजी चिकित्सालयों का भामाशाह/आयुष्मान महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े मेडिकल क्लेम का बकाया चल रहा 700 करोड़ रु का भुगतान अतिशीघ्र किए जाने को कहा है।

उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोरोना संकट में निजी चिकित्सालयों की भूमिका निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण है। निजी चिकित्सालयों में कार्यरत डाक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ या कर्मचारी अगर संक्रमित होता है तो उसी चिकित्सालय में क्वारेंटाइन/आइसोलेशन किया जाये न कि उस चिकित्सालय को सीज किया जाना चाहिए। क्योंकि सरकारी चिकित्सालय में कोरोना संक्रमित मरीज पाये जाने उसे सीज न कर सैनेटाइज करवाने के पश्चात् आवश्यक सावधानी के साथ पुनः सेवा संचालित कर दी जाती है। इसलिए उन्होंने निजी चिकित्सालयों के संगठन से चर्चा कर उन्हें विश्वास में लेकर कोरोना के विरुद्ध भागीदारी सुनिश्चित करने की मांंग की है।