डूंगरपुरः क्वारेंटीन सेंटर अनूठे नवाचारों से बना सकारात्मक माहौल, संगीत, योग, एरोबिक्स बने कोरोना से लड़ने की ताकत
जयपुर। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के इस दौर में लोगों के जे़हन में क्वारेंटीन सेंटर को लेकर एक भय की काल्पनिक तस्वीर बनी हुई है पर डूंगरपुर जिले में एक क्वारेंटीन सेंटर ऎसा भी है जहां पर भय नहीं आनंद है। नित नयें नवाचारों से वहां मौजूद लोगों को हर पल जीवन को एक नए उत्साह से जीने का तरीका सिखाया जा रहा है। कभी उल्लास भरते गीत है तो कभी मन को शांत करने के लिए अध्यात्म। कभी म्यूजिक थेरेपी से भीतर की सकारात्मक उर्जा को जागृत किया जाता है तो कभी योग और ध्यान से मन को साधने की कला को सिखाया जा रहा है। इन नवाचारों का परिणाम है कि वहां रहने वाले लोगों के मन में कोरोना के लिए डर दूर हो चुका है। इन अनूठे नवाचारों की बदौलत डूंगरपुर जिले का पारड़ा चुंडावत क्वारेंटीन सेन्टर एक रोल मण्डल के रूप में विकसित हुआ है । 

 

संगीत के तरानों, योगा, एराबिक्स, मेडिटेशन से बना पॉजिटिव वातावरण: 

 

क्वारेंटीन सेंटर पर रहने वालों की नींद अल सुबह 6 बजे सुमुधुर भजनों के साथ खुलती है। दैनिक क्रिया करने के बाद योग की क्लासेस लगती है। योग कराते समय दो टीम होती है एक क्वारेंटीन सेंटर के बाहर खुले मैदान में तथा दूसरी क्वारेंटीन सेंटर के भीतर। भीतर जो टीम मौजूद है उसके सदस्य भीतर के लोगों को लीड करते हुए दरवाजे के बीच खडे होकर बाहर मैदान में योग कर रहें लोगों को देखकर योग क्रियाएं संपादित है जिसे सेंटर के भीतर मौजूद सभी फॉलो करते है। इस तरह पूर्ण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए योग करवाया जाता है। इसके बाद म्यूजिक पर एरोबिक्स कराया जाता है । उसके बाद पसंद का नाश्ता मिलता है। नहाने के बाद दोपहर का भोजन। इसके बाद आराम की नींद। सायं 5 बजे पसंद के फिल्मी गाने जिसमें किशोर कुमार, रफी, लता मंगेशकर आदि अन्य गायकों के गाने सम्मिलित है, उसके बाद शाम को भजन, आरती और देशभक्ति के गानों के साथ भोजन करते हैं। 

 

बच्चों के लिए भी है गेम:

 

इस क्वारेंटीन सेंटर पर आने वाले बच्चों के लिए भी चित्रकारी, अंताक्षरी के साथ ही अन्य गेम जैसे स्पेलिंग, पर्यायवाची, शब्द उच्चारण आदि के माध्यम से रोचकता दी जाती है। इसके कारण ही वहां पर रहने वाले बच्चों को होस्टल की तरह माहौल मिलता है। 

 

साइकोलॉजिकल सपोर्ट के लिए काउंसलिंग:

 

अक्सर क्वारेंटीन सेंटर पर आने वालों लोगों के मन में एक अनावश्यक भय होता है कि कहीं कुछ होना जायें, अब उनके घर परिवार का क्या होगा। ऎसे कई अनवाश्यक चिंताओं के कारण कई संक्रमित लोग गुमसुम रहते है, ऎसे में इन लोगों को साइकोलॉजिकल सपोर्ट देने के लिए इस सेन्टर में काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे संक्रमित व्यक्ति को प्रतिदिन सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए शरीर क्रिया विज्ञान को आध्यात्म से जोड़ते हुए समझाया जा रहा है।

 

खुद ही तय करते है मीनू:

 

क्वारेंटीन सेंटर पर रहने वाले लोग ही रोज अपना मीनू खुद तय करते हैं और उनको भोजन भी उसी के अनुरूप मिलता है । विटामिन सी की अच्छी डाइट और अच्छी जीवन शैली से पॉजिटिव लोग नेगेटिव हो चुके है। 

 

जिले के पारड़ा चुंडावत क्वारेंटीन सेंटर प्रभारी एवं उपखण्ड अधिकारी साबला मनीष फौजदार का कहना है कि शुरुआती दिनों में देखा गया कि यहां पर रहने वाले लोग दिनभर गुस्सा करते थे तथा उनमें एक अनावश्यक भय के कारण चिड़चिड़ापन ज्यादा रहता था। हमने उनकी इस परेशानी को समझा तथा इन सभी लोगों को मानसिक शांति और दिमाग को डाइवर्ट करने के लिए ये प्रयास शुरू किये। सबसे पहले म्यूजिक थेरेपी का प्लान किया गया। म्यूजिक सिस्टम होस्टल में लगाया इसे यूट्यूब से जोड़ दिया जिसमें दिनभर का शेड्यूल भी जोड़ दिया गया यानी सुबह भजन, दोपहर को फिल्मी गाने, शाम को भजन, आरती और देशभक्ति फरमाईश गीत लगाने शुरू कर दिए। इसके परिणाम सामने आये तथा उनके चिड़चिड़ापन को लगभग खत्म कर दिया गया। इन नवाचारों के कारण क्वारेंटीन सेंटर पर ऎसा वातावरण तैयार किया गया है कि पारड़ा चुंडावत क्वॉरेंटाइन सेंटर पर कोई भी स्टाफ ड्यूटी करने से घबराता नहीं है।

 

जिला कलेक्टर कानाराम ने भी इस क्वारेंटीन सेंटर पर पहुंच कर निरीक्षण किया तथा इन नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि पारडा चुण्डावत क्वारेंटीन सेंटर पर किये गये नवाचारों से वहां मौजूद लोगों में डर नहीं वरन् एक सकारात्मकता है और निःसन्देह यह प्रयास सराहनीय एवं अनुकरणीय है।