जिले के नमूनों के अलावा पड़ौसी जिले की भी हो रही हैं जांचें, सरकार की पहल और भामाशाहों के दम पर हासिल की सफलता
कोविड - 19 की जांच में भीलवाड़ा ने पकड़ी रफ्तार

 

जयपुरकोरोना संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के प्रयासों की सफलता सर्वप्रथम भीलवाड़ा में देखने को मिली। राज्य सरकार के त्वरित निर्णय और जिला प्रशासन द्वारा उन पर सटीक अमल करने से भीलवाड़ा ने कोरोना संक्रमण को न केवल नियंत्रित करने में सफलता हासिल की बल्कि देशभर में ‘मॉडल‘ के रूप में उभरा जिससे प्रदेश का नाम देशभर में रोशन हुआ। यही नहीं कोविड - 19 की जांच के संबंध में भी राज्य सरकार की मंशा पर भीलवाड़ा तेजी से खरा उतरा है। 26 अप्रेल से यहां कोरोना की जांच प्रारम्भ हुई और आज यहां प्रतिदिन 6 से 8 सौ तक सेम्पल की जांच की जा रही है जिसमें भीलवाड़ा के अलावा चित्तौड़गढ़ के सेम्पल्स भी शामिल हैं।

 

आरवीआरएस मेडीकल कॉलेज प्रिंसिपल श्री राजन नंदा बताते हैं कि सर्व प्रथम राज्य सरकार ने प्रदेश में नवस्थापित मेडीकल कॉलेज में जांच की सुविधा प्रारम्भ करने की योजना बनाई थी। बाद में मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में यह सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। भीलवाड़ा ने इस कार्य में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए मेडीकल कॉलेज लैब में न केवल जांच कार्य प्रारम्भ कर दिया बल्कि बहुत ही कम समय में इसकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। इस सफलता में राज्य सरकार की नीतियों के साथ ही जिला कलक्टर श्री राजेंद्र भट्ट के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से मिले भामाशाहों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। एक आरटी पीसीआर मशीन राज्य सरकार के निर्देश पर उपलब्ध होने पश्चात भामाशाहों के सहयोग से तीन और मशीनें भीलवाड़ा को उपलब्ध हुई है।

 

वर्तमान में हो रहे 6 से 8 सौ टेस्ट

 

डॉ. नंदा ने बताया कि वर्तमान में मेन्यूअल आरएनए एक्सट्रेशन करते हुए औसतन 6 से 8 सौ जांच प्रतिदिन की जा रही है। शीघ्र ही प्रशिक्षित स्टाफ लगाकर मेन्यूअल क्षमता भी एक हजार जांच प्रतिदिन कर दी जाएगी। उधर, राज्य सरकार ने ऑटोमेटिक आरएनए एक्सट्रेशन मशीन का ऑर्डर दे रखा है। उसके उपलब्ध होते ही भीलवाड़ा की क्षमता प्रतिदिन 12 से 15 सौ जांच तक पहुंच जाएगी।

 

आत्मनिर्भरता के साथ ही पड़ौसी जिलों के लिए उपयोगी

 

शुरुआत में भीलवाड़ा के सेम्पल सवाई मान सिंह अस्पताल जयपुर भिजवाए जाते थे। वहां प्रदेश के अधिकांश जिलों का भार होने से जांच रिपोर्ट आने में दो दिन लग जाते थे। कभी-कभी 3-4 दिन की देरी भी हो जाती थी। अब उसी दिन या अगले दिन जांच रिपोर्ट मिलने लगी है। राज्य सरकार के प्रयासों से कोरोना जांच के मामले में भीलवाड़ा न केवल आत्मनिर्भर हो गया है बल्कि पड़ौसी जिले चित्तौड़गढ़ की जांचें भी यहां हो रही है। भीलवाड़ा के साढे पांच हजार सेम्पल की यहां जांच हो चुकी है वहीं चित्तौड़गढ़ के प्रतिदिन 3 से 4 सौ सेम्पल की जांच की जा रही है।

 

तीन चरण में होती है जांच

 

डॉ. नंदा ने बताया कि कोविड जांच में तीन चरण की पूरी प्रक्रिया होती है। 6-7 प्रकार की मशीनों का उपयोग विभिन्न चरणों में होता है। पहले आरएनए एक्सट्रेशन किया जाता है उसके बाद प्री पीसीआर और अंत में पीसीआर सेक्शन। इस कार्य को मेडीकल कॉलेज के बायो केमिस्ट्री और माइक्रो बायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर्स की देखरेख में प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा सम्पादित किया जा रह है। वर्तमान में लैब में माइनस 29 डिग्री के 3 फ्रीज, माइनस 80 डिग्री का एक फ्रीज, 1 लेमीनस फ्लो और 2 कोल्ड सेंट्रीफ्यूज मशीनें उपलब्ध हैं। बायोसेफ्टी कैबीनेट की संख्या दो से बढ़ाकर तीन की जा रही है जिससे मेन्यूअल कार्य करना और भी सुरक्षित हो सके।