मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश में सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने घर के सफर पर पैदल ही निकले श्रमिकों को किया बसों से रवाना
जिला प्रशासन द्वारा राह चलते मध्यप्रदेश के श्रमिकों को रोककर, भोजन, विश्राम की व्यवस्था, अगले दिन भोजन, चिकित्सा जांच के बाद किया रवाना, यूपी के लिए 520 एवं बिहार के लिए 301 श्रमिक सीमा पर भरतपुर जिले में लगाए गए शिविरो तक रवाना

 

जयपुर। मध्यप्रदेश के कटनी जिले और अन्य स्थानों मेें स्थित अपने घरों के लिए वाया जयपुर किशनगढ-अजमेर से सोमवार दोपहर पैदल ही रवाना हुए 27 श्रमिकों के समूह को मंगलवार को जयपुर जिला प्रशासन द्वारा मध्यप्रदेश सीमा पर छबड़ा में लगाए गए कैंपों तक बस में बिठाकर रवाना कर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने ऎसे सभी श्रमिकों से अपील की है कि राज्य सरकार द्वारा उनके लिए वाहनों की व्यवस्था की जा रही है, पैदल नहीं निकलें।

 

जिला कलक्टर डॉ.जोगाराम ने बताया कि पैदल अपने घरों को निकले श्रमिकों के लिए वाहनों की व्यवस्था होने तक मुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके रास्ते में ही उपयुक्त स्थान पर शिविर बनाए गए हैं। मध्य प्रदेश सीमा तक भेजे गए 27 श्रमिकों को सोमवार रात्रि मेंं टाेंक रोड पर पैदल चलते पाया गया था। इन्हें वहीं रोककर जसोदा देवी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में कैम्प कराया गया। रात्रि में एवं सुबह इन्हें भोजन दिया गया एवं इनकी स्वास्थ्य जांच की गई। राजस्थान रोडवेज की बस में इनको छबड़ा में मध्यप्रदेश सीमा पर लगाए गए शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। 

 

ये श्रमिक बताते हैं कि पिछले पांच माह से घर नहीं जा पाने एवं लम्बे लॉकडाउन के कारण उपजी निराशा के कारण ही उन्होंने पैदल ही घर के लिए निकलने का जोखिम उठाया। उन्होंने जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार का बस की व्यवस्था और देखभाल के लिए धन्यवाद करते हुए खुशी का इजहार किया। वापसी में इस बस के सभी यात्रियों के लिए राधास्वामी सत्संग न्यास में  भोजन की व्यवस्था की गई। 

 

इसी प्रकार कानोता चैक पोस्ट पर शनिवार, रविवार एवं सोमवार को 280 मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए चलते मिले थे। इनमें से 210 यूपी एवं 70 बिहार के लिए निकले थे। इन्हें भी स्थानीय राजकीय सीनियर सैकण्डरी विद्यालय कानोता एवं राजकीय बालिका सीनियर सैकण्डरी विद्यालय कानोता में कैम्पों में रखा गया था। इनके साथ ही पहले से कैम्पों में रह रहे इन्हीं राज्यों के 541 श्रमिकों को भी भरतपुर सीमा पर लगाए गए शिविरों में राजस्थान रोडवेज की बसों में भेजा गया है।