प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट चिकित्सक मनाएंगे ब्लैक फ्राइ डे
प्रदेश के सभी सरकारी व प्राइवेट चिकित्सक काला झंडा लहराकर जताएंगे विरोध, काली पट्टी बांधकर करेंगे रोगियों का उपचार

 

जयपुर।  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एवं अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ की ओर से कोरोना आपदा नियंत्रण कार्य कर रहे चिकित्सक के साथ 21 अप्रैल को अजमेर एसडीएम द्वारा अभद्र व्यवहार करने के मामले में कार्रवाई नहीं होने पर शुक्रवार को प्रदेश भर के चिकित्सकों द्वारा विरोध जताया जाएगा। 

 

अरिस्दा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन से आमजन को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो इसको दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश के सभी सरकारी व निजी चिकित्सकों द्वारा शुक्रवार को काला झंडा लहराकर विरोध जताया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी चिकित्सक ( सरकारी और निजी ) संस्थानों के बाहर सुबह आठ 8 बजे या ओपीडी शुरू होते समय और दोपहर 2 बजे ओपीडी समाप्त होते समय सांकेतिक रूप से दो-चार के समूह में काला झंडा हवा में दो से पांच मिनट तक लहराएंगे। 

 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ एमएन थरेजा तथा सचिव डॉ वीके जैन ने बताया कि लॉक डाउन के चलते काले झंडे की अनुपलब्धता रहने पर कोई भी काला कपड़ा जैसे शर्ट, टी-शर्ट, दुपट्टा आदि इस प्रदर्शन के लिए काम में लिया जाएगा। इसकी व्यवस्था गुरूवार को सभी चिकित्सक अपने अपने स्तर पर सुनिश्चित कर लिया गया है।

 

काली पट्टी बांधकर करेंगे रोगियों का उपचार

प्रदेशाध्यक्ष डॉ चौधरी ने बताया कि इस दौरान प्रदेश के किसी रोगी के उपचार में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होंगी। सभी चिकित्सक काली पट्टी बांधकर अपनी सेवाएं देंगे। वहीं कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यथासंभव काला फेस मास्क या मास्क लगाकर उस पर काला रिबन लगाएंगे। वहीं चिकित्सक एकता प्रदर्शन के लिए अपनी व्हाट्सएप डीपी, फेसबुक प्रोफाइल कवर और प्रोफ़ाइल पिक्चर और फेसबुक स्टोरी ब्लॉक फ्राइडे और 8 मई 2020 लगाएंगे। 

 

हैश टैग ब्लैक फ्राइ डे

उन्होंने प्रदेश के सभी चिकित्सकों से आह्वान किया है कि 8 मई को प्रातः 11 से 2 बजे के बीच ट्विटर पर हैश टैग ब्लैक फ्राइडे के साथ अधिक से अधिक ट्वीट करें। हम अपनी लड़ाई सड़क पर भी लडेंगे और सोशल मीडिया पर भी। प्रदेशाध्यक्ष डॉ चौधरी ने बताया कि सभी तरह की चिकित्सक सेवाएं ( निजी, सेवारत ) निरंतर जारी रहेंगी। किसी तरह का कोई व्यवधान राज्य में कोरोना आपदा के समय पीड़ित मानवता की सेवा में नहीं होने दिया जाएगा। आम जनता को कोई परेशानी नहीं हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। कोरोना आपदा की रोकथाम और नियंत्रण के लिए प्रदेशभर में चल रही सभी तरह की सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी। जो चिकित्सक जहां जिस तरह की सेवा दे रहा हैं वह वहीं सेवा कार्य करते हुए उपरोक्त विरोधात्मक तरीकों से अपना विरोध जताएंगा और अपना चिकित्सक धर्म निभाएगा। प्रदर्शन की फोटोज़ सभी व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर शेयर भी की जाएगी। 

 

यह है मामला

अजमेर में कोरोना आपदा नियंत्रण का कार्य रहे चिकित्सक के साथ 21 अप्रैल को अजमेर एसडीएम द्वारा अभद्र व्यवहार करने तथा पुलिस में एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई थी। प्रदेशाध्यक्ष चौधरी ने बताया कि अजमेर एसडीएम ने रात 10.30 बजे सीएमएचओ कक्ष में आकर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। कोविड-19 के 35 केस पॉजीटिव होने पर सीएमएचओ टीम पर लापरवाही के आरोप लगाए। एसडीएम ने कक्ष में पहले से बैठी महिला चिकित्सक के हाथ में मोबाइल देखकर रिकॉर्डिंग करने का आरोप लगाया और उनका मोबाइल छीन लिया। मामले को लेकर अजमेर के चिकित्सक पुलिस थाने पर गए तो एसपी ने मामला दर्ज करने के लिए समक्ष नहीं होने  का तर्क देते हुए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में संघ की ओर से मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजकर मामला दर्ज करने की गुहार लगाई गई है। वहीं 14 दिन से अजमेर के डॉक्टर काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे है, लेकिन दोषी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व में भी पीली बंगा, भरतपुर, झालावाड, ब्यावर सहित कई जगहों पर ऐसे मामले हो चुके है। 

 

राज्य के स्वास्थ्य प्रबंधन के सुधार के लिए ये भी मांगे

इसके अलावा राज्य के निजी व सरकारी चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को कोरोना आपदा के समय कार्य करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है, जिसमें ये मांगे मुख्य हैं 

1. प्रदेश में मेडिकल कैडर का गठन किया जाए, चिकित्सा विभाग में सभी अधिकारी चिकित्सक हों औऱ उनका सीनियरिटी और अनुभव के आधार पर पदस्थापन हो।

2. कोरोना के कहर में राज्य में चिकित्सक चाहे वह सरकारी चिकित्सक, रेजिडेंट्स अथवा प्राइवेट चिकित्सक हो सबको आधारभूत सुरक्षा संसाधन मिलने चाहिए। राज्य की जनता की जिंदगी की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।

3. रेजिडेंट डॉक्टर्स को आवास में दिक्कतें आ रही है। वहीं डॉक्टर्स एवं अन्य स्टॉफ को घटिया क्वालिटी का खाना मिल रहा है, जो कि है बेहद गलत। 

4. राजस्थान के सेवारत चिकित्सकों से सरकार ने वादा एवं समझौता किया था की हर साल की 1 अप्रेल को तब तक की बकाया प्रमोशन लिस्ट जारी की जाएगी, लेकिन बरसों बीतने के बाद भी नहीं हुई डीपी और डीएसीपी। यह सेवारत चिकित्सकों के साथ अन्याय है।

6. प्रदेश में करीब 950 पीजी की सीटें बढ़ने का इस साल प्रस्तावित था। केन्द्र सरकार ने मंजूरी भी दे दी, लेकिन राज्य सरकार की निष्क्रियता से ये सीटें लैप्स हो रही है। 

7.प्रदेश के इंटर्न चिकित्सकों को दिया जा रहा भत्ता एक श्रमिक के लिए निर्धारित न्यूनतम मज़दूरी से भी कम है। 

8. राज्य के समस्त प्रशासनिक अधिकारी जो कि कोरोना मरीजों से काफी दूर हैं उनके पास पर्याप्त से भी अधिक मास्क औऱ सुरक्षा साधन हैं, जबकि कोरोना मरीजों के साथ ड्यूटी कर रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सा स्टॉफ इनसे महरूम है।