राजस्थान और पंजाब के 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण कार्यवाही

जोधपुर। टिड्डी नियंत्रण अभियान के तहत अब तक कुल 14299 हेक्टेयर क्षेत्र में  गुलाबी अपरिपक्व वयस्क टिड्डियों के खिलाफ नियंत्रण की कार्यवाही की गई है। नियंत्रण अभियान अभी जारी रहेगा। अब तक राजस्थान के सात जिलों तथा पंजाब के एक जिले में कार्यवाही की गयी है। टिड्डी चेतावनी संगठन से मिली जानकारी के अनुसार जैसलमेर में 2114, श्रीगंगानगर में 3220, जोधपुर में 3215, बाड़मेर में 3835, नागौर में 1020, अजमेर में 235 और पाली में 75 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। पंजाब के फाजिल्का जिले में 585 हेक्टेयर में नियंत्रण अभियान चलाया गया।


वर्तमान में गुलाबी अपरिपक्व कीड़ों का धावा, जो रेगिस्तानी टिड्डे का सबसे तेज चरण है, ऊंची उड़ान भर रहा है। टिड्डी दल दिन में एक जगह से दूसरी जगह पर लंबी दूरी तय कर रहा है। पाकिस्तान की ओर से आने वाली पश्चिमी तेज़ हवाओं के कारण ये गुलाबी अपरिपक्व वयस्क टिड्डे रात के दौरान पेड़ों पर ठहर जाते हैं। उच्च तापमान होने के कारण टिड्डी दल सुबह जल्दी ही उड़ना शुरू कर देता है। इस वर्ष भारत में समय से पहले रेगिस्तानी टिड्डियों के आक्रमण की सूचना है। जैसलमेर और श्रीगंगानगर जिलों में 11 अप्रैल से कीड़ों की घुसपैठ की सूचना मिली थी। टिड्डियों के वयस्क समूह और अपरिपक्व गुलाबी वयस्कों के दल का भारत में आगमन 30 अप्रैल से शुरू हुआ। 


वर्तमान में टिड्डी चेतावनी संगठन के पास यूनिफ़ाइड लॉंच व्हिकल (यूएलवी) स्प्रेयर से लैस 50 वाहन हैं। टिड्डी नियंत्रण संगठन यह अभियान यूएलवी स्प्रेयर से तो चला ही रहा है साथ ही राज्य कृषि विभाग के साथ मिलकर ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, फायर फाइटर्स का उपयोग भी किया जा रहा है। टिड्डी चेतावनी संगठन 60 नए यूएलवी  स्प्रेयर, 50 नए कैंपर वाहन और 5 छिड़काव किटों की खरीद कर रहा है जिन्हें टिड्डी दलों पर नियंत्रण करने के लिए भारतीय वायु सेना के हेलीकाप्टरों पर फिट किया जाएगा।


संयुक्त राष्ट्र संघ के कृषि और खाद्य संगठन (एफएओ)टिड्डी दल की वास्तविक स्थिति के बारे में जानने के लिए एसडब्ल्यूएसी-टीओसी सदस्यों की साप्ताहिक बैठक आयोजित कर रहा है ताकि नियंत्रण ऑपरेशन प्रभावी तरीके से चलाया जा सके। एफएओ की नवीनतम जानकारी  के अनुसार बलूचिस्तान में वसंत प्रजनन क्षेत्रों से अपरिपक्व वयस्क समूहों का माइग्रेशन शुरू हो गया हैं। भारत-पाक सीमा पर गर्मियों के प्रजनन क्षेत्रों में अपरिपक्व तथा उनके झुंड दिखाई दिए हैं।