टोंक और बूंदी में मनरेगा बनी गरीबों का संबल

जयपुर। वैश्विक महामारी कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन 3.0 में भी लोगों को यथासंभव घरों में ही रहने की अपील की जा रही है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा कार्य प्रारम्भ करने की छूट दिये जाने की वजह से गाँव वालों के लिए मनरेगा आजीविका का साधन बन रही है। गांवों में जॉब कार्ड धारक श्रमिक परिवारों को मनरेगा में मजदूरी मिल रही है। प्रदेश के टोंक और बूंदी जिले में कोरोना के विरुद्ध लड़ी जा रही लड़ाई में मनरेगा ग्रामीणों का संबल साबित हुई है।


टोंक जिले में 81 हजार श्रमिकों को मनरेगा कार्यों पर रोजगार दिया गया है। इस मामले में टोंक जिला राज्य में पांचवें स्थान पर है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवनीत कुमार ने बताया कि जिले की सभी ग्रामीण पंचायतों में मनरेगा का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार मिलने से लॉकडाउन के दौरान यह योजना वरदान साबित हो रही है।


बूंदी जिले में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जिले की 13 ग्राम पंचायतों में जिला कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा ने 40 कार्यों के लिए चार करोड़ 15 लाख रूपये स्वीकृत किए हैं। इससे जॉब कार्ड वाले श्रमिक परिवारों के लिए एक लाख 57 हजार मानव दिवस रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।


दोनों ही जिलों में मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में तलाई की खुदाई, नालों को गहरा करने, चारागाह भूमि की बाड़बंदी, ग्रेवल सड़क के निर्माण, पौधारोपण, खाई की मरम्मत, नालियों की खुदाई, शमशान  के सुधार, एनिकट को गहरा करने और नाड़ियों के निर्माण जैसे कार्य करवाए जा रहे हैं।