आलाकमान की चापलूसी से मंत्री बने रघु शर्मा प्रदेश के अब तक के सबसे नाकाबिल मंत्री : डाॅ. अरूण चतुर्वेदी
ऐसे निकृष्ट मंत्री को सरकार से बाहर कर प्रदेश का भला करें गहलोत : लक्ष्मीकान्त भारद्वाज

जयपुर, 05 जून।
 भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. अरुण चतुर्वेदी एवं प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकान्त भारद्वाज ने चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा द्वारा भाजपा प्रदेश नेतृत्व पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आलाकमान की चापलूसी से मंत्री बने रघु शर्मा प्रदेश के इतिहास के सबसे नाकाबिल चिकित्सा मंत्री है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ऐसे निकृष्ट मंत्री को सरकार से बाहर कर प्रदेश की जनता का भला करना चाहिए।

पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि अपनी अयोग्यता को छिपाने के लिए रघु शर्मा ऐसे बयान देते ही रहते है। जब से वे चिकित्सा मंत्री बने है तब से प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्थाओं का भट्टा बैठ गया है। पहले प्रदेश में स्वाइन फ्लू से देश में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई, उसके बाद अस्पतालों में अव्यवस्थाओं के चलते सैंकड़ों बच्चों की मौत हो गई और कोविड-19 के दौरान अस्पतालों में लोग परेशान होते रहे और अयोग्य चिकित्सा मंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए आलाकमान की चापलूसी करते रहे। मंत्री विश्वेंद्र सिंह, कांग्रेस विधायक भरत सिंह, हरीश मीना, राजकुमार शर्मा द्वारा सरकार की खिलाफत से कांग्रेसी नेतृत्व डरा हुआ है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकान्त भारद्वाज ने कहा कि रघु शर्मा खुद एक दोयम दर्जे के नेता है। प्रदेश में उनकी क्या साख है सब जानते है। ये अहंकारी मंत्री कभी प्रधानमंत्री का नाम लेकर झूँठ बोलते है और कभी भाजपा अध्यक्ष पर अनर्गल टिप्पणी करते है। इसलिए रघु शर्मा को मानसिक स्वास्थ्य लाभ की भी जरूरत है। मुख्यमंत्री को ऐसे भ्रष्ट और निकृष्ट मंत्री को तुरन्त मंत्रीमण्डल से बाहर कर प्रदेश की जनता पर उपकार करना चाहिए। डाॅ. सतीश पूनियां और भाजपा के किसी नेता को ऐसे चापलूस और निकम्मे मंत्री के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। रघु शर्मा की छवि और इतिहास पूरा प्रदेश जानता है। राज्यसभा चुनाव में असंतुष्ट विधायकों द्वारा बगावत की आशंका के चलते कांग्रेस नेता बौखला गए है।

सांसद रामचरण बोहरा, स्वामी सुमेधानन्द, दीया कुमारी, भागीरथ चैधरी ने कहा कि कोविड-19 के संकट के दौरान पूरे प्रदेश में जनता परेशान होती रही। भामाशाहों, समाज सेवी संस्थाओं और सेवा भारती जैसी संस्थाओं ने लोगों की मदद की, उन्हें राशन और चिकित्सा सुविधाऐं मुहैया करवाई, सरकार ने तो लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने तो इतने खराब हालात में भी सवाई मानसिंह अस्पताल में जाकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली, डाॅक्टर और बाकी लोगों से मिले, क्वारेन्टाइन सेंटर्स पर जाकर वहाँ के हालात की जानकारी ली एवं अव्यवस्थाओं से सरकार को अवगत करवाया। कोरोना वाॅरियर्स का हौंसला बढ़ाया। लेकिन जिन चिकित्सा मंत्री पर इनकी जिम्मेदारी थी वो घर में सोते रहे।

विधायक वासुदेव देवनानी, अनिता भदेल, सुरेश रावत ने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री सभी कोरोना के प्रबन्धन में पूरी तरह फेल हो चुके है। दवा, पीपीई किट खरीद में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। खुद चिकित्सा मंत्री अपने निर्वाचन क्षेत्र और जिले में भी लोगों की सुध लेने नहीं गए और अब मुख्यमंत्री के इशारे पर इस तरह के बयान दे रहे है। सोनिया गाँधी मजदूरों के नाम पर चन्दा उगा रही है, प्रदेश की सरकार राजस्थान के लोगों का पैसा भ्रष्टाचार से दिल्ली दरबार में पहुँचा रही है।

विधायक रामलाल शर्मा, अशोक लाहोटी, निर्मल कुमावत, अभिनेश महर्षि, ने कहा कि भाजपा के प्रदेश के नेता अपनी मेहनत, ईमानदारी और जनता के प्रेम की बदौलत राजनीति में ऊँचाई तक पहुँचे है, संकट के इस समय में भी उन्होंने प्रदेश की जनता की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने एक लाख से ज्यादा लोगों से संवाद किया, हजारों कार्यकर्ताओं के माध्यम से लाखों लोगों को भोजन राशन पहुँचाया, देश-विदेश में फँसे प्रवासी राजस्थानियों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिए पुरजोर प्रयास किए। सरकार के सताए लोगों की आवाज बुलंद की, ऐसे नेता के बारे में चापलूसी से मंत्री बने एक नेता द्वारा की गई अनर्गल टिप्पणी की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।