भारत नेपाल कृत्रिम विवाद, चीन चर्च इस्लामिक चाल
अशोक चौरसिया 

 

समय रहते सम्भल जावो, जोश में नहीं होश में आओ, अन्यथा ए कर देंगे बेहोस, नेपाल भारत हिन्दू लडा़एंगे, नेपाल को फिर नोच खाएंगे, भारत नेपाल दो देश जरुर हैं, पर दोनों की एक आत्मा हैं।

 

नेता व दल देश नहीं होते अपितु देश के शासक होते हैं। शासक आते हैं जाते हैं। पर देशभक्त समाज व शासक शान्ति मित्रता समृद्धी व जनता के हितों की रक्षा करता है। पडो़सी देशों से हर सम्भव इमानदारी से मिलकर सह अस्तित्व में विश्वास करता है। अन्याय व अतिक्रमण से बचता है। देश व देश की जनता कैसे शक्तिशाली समृद्ध व आत्म निर्भर हो इस की चिन्ता करता है। दूसरों के बहकावे में नहीं आता। मित्रता निश्छल व विश्वस्त होती है। मित्रता में चालाकी या धुर्तता नहीं चलता है। मित्र देश के पीठ में खंजर नहीं भोंका जाता। मित्रघाती नहीं होता। 

 

पर कभी कभी नालायक दल व उसके नेता सत्ता पर काबिज हो जाते है एवं सत्ता लोभ में जनता को द्वन्द व भय में जीने को बाध्य करते हैं, जिससे नालायक सरकार के बिरुद्ध जनता खडी़ न हो सके। इस लिए जनता को विभाजित, गरीब, दुर्बल रखना इनकी नीति होती है, षणयंत्र व चाले चलना इनकी फितरत होती है। यही कम्युनिष्टों का सत्ता सिद्धान्त भी है। देश की जनता अमीर न बने इसके लिए हर हथकण्डे अपनाना, जनता गरीबी में रहेगी तो साम्यवाद फलेगा फूलेगा। जनता समृद्ध होते ही साम्यवाद खतरे में पड़ जाएगा। ऐसे ही साम्यवादियों का सत्ता भोगने व कायम रहने का दूसरा मूल मंत्र है, पडो़सी देश से तनाव बनाए रखना। कुछ न कुछ बहाने ढुंढते रहना जिससे पडो़सी देश से संबंध मधुर न हो तथा पडो़सी देशका भय दिखा कर जनता को दिग्भ्रमित रखा जा सके व इसके आड़ में सरकार की नाकामियों को छुपाई जा सके। यदि पडो़सी देश भी कम्युनिस्ट हो तो दोनो मिलकर अपने अपने देश की जनता का तो और बुरा हाल करते हैं ।उदाहरण चीन तथा उत्तर कोरिया। आप समझ सकतें हैं चीन और उत्तर कोरिया की कम्युनिस्ट सरकारों में कितनी गहरी दोस्ती है तथा दोनो देशों में तानाशाही चरम पर है, जनता का बुरा हाल है।

 

लोकतंत्र मृत है अधीनायकवाद चरम पर है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने तो लोकतंत्र समर्थक अपने ही देश के लाखों प्रदर्शनकारियों को ताइनानमेन चौक पर  टैंको के निचे कुचल कर तथा तोपों से उडा़ कर क्रुरतम हत्या की थी। उत्तर कोरिया की जनता तो गुलाम से भी बदत्तर जीवन जीने को बेवश है। क्या नेपाल भी चीन व उत्तर कोरिया जैसा बने आप चाहते हैं?  अगर नहीं तो राक्षस ड्रेगन को समझिए, उसके पंजो में फंसने से नेपाल को बचाईए। यही है असली नेपालभक्ति राष्ट्रभक्ति। चीन के शह पर आज जो नेपाल में देशभक्त बने हैं वो ढोंगी  हैं, धुर्त हैं देश के सौदागर हैं। इसे नेपाल की जनता को ठीक से समझना होगा।

 

चीन के पैसे व हथियार से नेपाल में भी कम्युनिस्ट माओवादियों ने 10 साल तक जनयुद्ध किया। 20000 से अधिक नेपालियों को मौत के घाट उतार दिया। राजा विरेन्द्र शाह की वंश सहित हत्या की। आते ही नेपाल को उस की जड़ हिन्दूराष्ट्र से काट दिया। नेपाल की जनता तथा विश्व को राजा व उनके परिवार की हत्या का सत्य आज तक पत्ता नहीं चल पाया। राजा विरेन्द्र शाह की हत्या पूरे वंश की हत्या आज भी एक पहेली है। माओवादी कम्युनिस्टों ने विश्व का एक मात्र हिन्दूराष्ट्र नेपाल की हत्या कर दी। नेपाल आज केवल भूमि के टुकडे़ की तरह हो गया है, जिस पर हरेक पार्टियाँ केवल सत्ता सुख भोगने की होड़ में दिख रहीं है। राष्ट्र की असली पहचान,सांस्कृतिक गौरव इतिहास की रक्षा हेतु कोई दल चिन्तित है ऐसा दिखाई नहीं देता।

 

कोई ईसाई शक्तियों, कोई मुस्लिम शक्तियों तो कोई चीनी कम्युनिस्ट शक्तियों से और कोई अमेरिकी युरोपिय शक्तियों से पोषित व संचालित दिखाई दे रहा है। देश व देश की जनता का विकास प्रगति समृद्धी पर किसी का ध्यान नहीं है। देश का गौरव हिन्दूराष्ट्र, देश के महान राजाओं पुर्वजों के गौरव, देश के बिरासत सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने उसे संवर्धित संरक्षित करने की चिन्ता किसी को नहीं है। अपने ही देश के आधुनिक निर्माताओं के चित्र नेपाली नोट से कैसे हटे? पृथ्विनारायण शाह सहित अन्य राजाओं की मुर्तियाँ स्मृतियाँ कैसे तोडी़ व मिटाई जाए इसके बहाने ढुंढने में लगे हैं। कारण नेपाल का राज परावार तो भारतीय है।शाह वंश व राणा वंश का उद्गम तो राजस्थान गुजरात है। यानी इससे भारत नेपाल के संबधी रक्त संबंध, नेपाल निर्माण संबंध आदि से कहीं और मजबूत हो जाए, डरते हैं। इसलिए हरेक जड़ पर प्रहार करने को सदैव तत्पर रहते हैं।

 

नेपाल में चर्च, चीन और ईस्लाम का तेजी से विस्तार कैसे हो सके? चीन समर्थित कम्युनिस्टों की पकड़ नेपाल में कैसे मजबूत हो। नेपाल की जनता को जातियों उप जातियों में कैसे बाँटा जा सके? नेपाल की जनता को कैसे भारत के खिलाफ भड़काया जा सके?कैसे सोते उठते हर बिषय व नाकामी में भारत को कोसा जा सके। इन्हीं विचारों में नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार व्यस्त रहती है। नेपाल के सच्चे देशभक्तों को जडो़ से काटने का इनके गहरे षणयंत्रों को समय गवाँए बिना समझना होगा। ठीक उसीतरह जिस तरह छद्म धर्म निरपेक्षता का चोला ओड़ भारत में कांग्रेस ने 65 वर्ष तक शासन किया, भारत को जी भर लूटा और जो असली राष्ट्रवादी देशभक्त थे उन्हें साम्रदायिक फासिस्ट देश की एकता के लिए खतरा, भगवा ब्रिगड का भय, आम लोगों में भय, सत्ता सुख भोगते रहे।

 

आज नेपाल में भी 2003 से कुछ ऐसा ही चल रहा है। नेपाल की कांग्रेस व मधेशी दलों को भी देश, देश की जनता, देश के विकास की चिन्ता नहीं है। बस पार्टी को बड़ा फण्ड कहाँ से मिलता रहे इसकी ज्यादा चिन्ता है। हिन्दूराष्ट्र भाड़ में जाए नेपाल ईसाई, ईस्लाम या चीन के पकड़वाला अधीनायकवादी  देश ही क्यों न बन जाए? इन्हें तो बस युरोप अमेरिका अरब से व चीन से भी भारी भरकम पार्टी फण्ड कैसे मिलता रहे इसी की चिन्ता है ऐसा लगता है। एक अच्छी बात है की नेपाल के बहुत सारे संगठन अब इन सब विषयों पर विचार करे हैं। भारत नेपाल विवाद केवल राजनीतिक हथकण्डे हैं यह समझने लगे हैं।आज हजारों लाखों की संख्या में बीना कगसी दल के झण्डे के नेपाल के सचर्यचन्द्र अंकात तिकोने राष्ट्रीय झण्डा लेकर भ्रटाचार में डूबी, हर मोर्चे पर बिफल चीनपरस्त कम्युनिस्ट माओ केपी ओली सरकार के बिरोध में सड़को पर उत्तर आई है। नेपाल में यह एक अभूतपूर्व परिवर्तन का संकेत है।

 

कोरोना महामारी में नेपाल ने अपने ही प्रवासी नेपालियों से कोई हमदर्दी नहीं रखा। विदेशों में मरने के लिए छोड़ दिया। भारत में रोजी रोटी कमा रहे प्रवासी नेपालियों के लिए ओली सरकार ने नेपाल की सीमाएंँ तक बन्द रखी। पर भारत की मोदी युपी की योगी, उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र रावत, गुजरात के विजय रुपाणी, मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह, कर्णाटक के येद्दीयुरप्पा, हिमाचल की जयराम ठाकूर तथा बिहार की नीतीश सरकार ने हर ख्याल रखा। इन प्रवासी नेपालियों को बिना भेद भारतीयों की तरह हरेक ख्याल रखा। प्रवासी नेपालियों ने योगी मोदी जिन्दावाद के खुब नारे तथा केपी ओली मुर्दाबाद के नारे भी खुब वाइरल हुए। नेपाल की सरकार ने तो अपने ही नेपाली नागरिकों को भारत से आए लोग बताया, कोरोना कैरियर कह कर अपमानित किया। सीमा नाका पर जानवरों जैसा व्यवहार किया। दलित युवाओं की सामूहिक हत्या कर बागमती में डलवा दिया गया। वहाँ दलित, जनजाती, मधेशी उत्पिड़न रूक नहीं रहा है। ए सब हमने अभी कोरोना काल में देखा है।

 

चीन ने आधिकारिक रुप से सगरमाथा को अपना बताया। नेपाल सरकार को बताए बिना सगरमाथा का सर्वे किया। नेपाल सरकार से पुछे बिना सगरमाथा पर 5G Tower लगा दिया। 25 जवानों की चीनी सैन्य टुकडी़ टावर की सुरक्षा में तैनात कर दिया। उन्हें भोजन पानी पहुँचाने हेतू चीन की सैन्य बिमान सगरमाथा पर उडा़न भर रहे हैं। नेपाल की 11000 वर्ग किमी भूमि पर चीन ने कब्जा कर रखा है। परन्तु नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार मौन है। नेपाल की कांग्रेस व मधेशी दल तक चुप हैं। क्यों ? यह एक यक्ष प्रश्न है जो नेपाल की जनता जानना चाहती है। भारत बिरोध में रात दिन छाती पिटनेवाले सगरमाथा व चीन के कब्जे वाले नेपाली भूभाग पर मौन हैं।

 

आज नेपाल सुरक्षित है तो भारत के कारण ही सुरक्षित है नहीं तो कब का चीन खा गया होता। नेपाल में आज चर्च व ईस्लामिक शक्तियों का विस्तार तेज गति से हो रहा है। चीन का नेपाल में विस्तार जग जाहिर है। ऐसे में नेपाल के सच्चे व समझदार राष्ट्रभक्तों को समझना चाहिए। कि नेपाल को असली खतरा भगवा भारत से है, या चीन चर्च इस्लाम से है।

 

भारत व नेपाल दो देश एक आत्मा हैं। दोनो की जडे़ एक है। सम्पूर्ण भारत सांस्कृतिक नेपाल है और सम्पूर्ण नेपाल सांस्कृतिक भारत है। अतः भारत नेपाल के संबंध न बिगडे़, दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ व मजबूत हो यह प्रत्येक सच्चे नेपाली व भारतीय का कर्तव्य है। इस लिए सत्य के साथ हिम्मत से खडे़ होने का समय है। दोनों देशों की जडे़ काटनेवाले देशभक्त नहीं हो सकते। जडे़ खोदने वाले लोग हिन्दू बौद्ध बिरोधी शक्तियों के मोहरे है। इनके असली रुप को पहचाना होगा।

 

देश हमेशा तब तक अमर रहता है जब तक वह अपनी संस्कृति धर्म व पहचान व पूर्खों के गौरव को जीवित रखता है। अन्यथा वो देश एक भूमिका टुकडा़ मात्र रह जाता है, वह टुकडा़ शासन व शोषण का केन्द्र बन जाता है। पहचान मिटती है राष्ट्र मिट जाता है। उदाहरण पास का  गान्धार यानी आज का अफगानिस्तान, तोपों से तालिबानियों ने बिष्णु, शिव मन्दिरंध से लेकर बुद्ध के अवशेषों तक को उडा़ दिया। तोपों उडा़ते हुए दृश्य हम सबने टीवी पर देखा है। बिष्णु व बुद्ध का गान्धार राष्ट्र समाप्त हो गया। ऐसे ही राजा दाहिर का सिन्ध समाप्त हो गया। इस्लामिक राष्ट्र बन गया। ग्रीस मीट गया। बेबिलोन मिट गया। नेपाल की धर्म संस्कृति पहचान पूर्वज नोटों से राजाओं के चित्र सब मिटा दिए गए। दशहरे दीवाली में तीलक भाई टीका से भी लोगों को अलग करने का खेल कई वर्षों से शुरु है।

 

नेपाल का मुकुट यानी सर सगरमाथा पर आज चीन केवल दावा ही नहीं कर रहा है बल्की 5G टॉवर भी लगा दी है। टावर की सुरक्षा में 25 जवानों की सैन्य टुकडी़ भी तैनात कर दी है। सगरमाथा का सर्वे कर रहा है। चीन के सैन्य विमान सगरमाथा के चारो ओर चक्कर काट रहें हैं। नेपाल  व चीन की सरकारी मीडिया में ए बातें आ गई है। नेपाल की मीडिया को पैसा दे चुप करा दिया गया है। भारत के बिरोध में बोलने के लिए चीन चर्च मस्जिदों से खुब पैसे बाँटे जा रहे हैं। मुसलमान व ईसाई लोग छद्म नेपाली मधेशी हिन्दू नाम से फेक एकाउन्ट आईडी बना कर भारत बिरोध व नेपाल के संबंधों को बिगाड़ने व झूठे प्रंपोगाण्डा फैलाने में लगे हैं। क्यों की वो जानते हैं , ऐसा करने से उन्हें नेपाल में ईसाई मुसलमान कम्युनिस्ट गढ मजबूत करने में बडा़ लाभ मिलेगा।

 

अन्ततः हिन्दू, बौद्ध व  हिन्दूत्व समाप्त होगा। इधर नेपाली व भारतीय नेपाल के चुच्चे ( नोकिले) नयाँ नक्सा के पक्ष व बिपक्ष में लड़ते उलझते रहेंगे। इस लिए इस नये नक्से को षणयंत्र को समझना होगा। उलझने के बजाय सुलझने की समझदारी दिखाना होगा। सम्पूर्ण हिमालय, सगरमाथा सहित चीन के कब्जे से मुक्त हो इसके लिए जन आन्दोनल करना होगा। आवाज उठाना होगा। कैलाश मानसरोवर मुक्त हो इसके लिए व्यापक अभियान चलाना होगा। लिम्पिया धुरा, लिपुलेक व काला पानी तो हमारे घरका विवाद है। इसे सुलझा लेंगे। समझदार जनता को विधर्मियों के खेल व जाल में नहीं फंसना सावधान सतर्क व सतर्क रहना चाहिए। दो देश एक आत्मा हैं इसे कोई भी षड़यंत्र अलग नहीं कर सकती।

 

लेखक नेपाली सांस्कृतिक परिषद् के अंतरार्ष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।