गुजरात को ही ‘घर’ बना लेंगे श्रमिक, नहीं लेंगे ‘वापसी’ का नाम: विजय रूपाणी
ग़रीबों एवं श्रमिकों के लिए बनेंगे 1.60 लाख अफॉर्डेबल मकान, आदिवासी श्रमिकों को पक्का घर बनाने के लिए 35000 रुपए की सब्सिडी

 

अहमदाबाद। कोरोना वायरस (CORONA VIRUS) से फैली वैश्विक महामारी (COVID 19) के कारण देश भर में 68 दिनों तक लागू रहे लॉकडाउन (LOCKDOWN) ने निर्धन वर्ग की कमर तोड़ दी। इनमें भी सबसे अधिक कष्ट और पीड़ा करोड़ों श्रमिकों को सहनी पड़ी, जिन्हें पहले रोज़ी से हाथ धोना पड़ा। फिर रोटी के लाले पड़ने लगे। ऐसी स्थिति में समग्र देश में अलग-अलग राज्यों में रहने वाले अन्य राज्यों के श्रमिकों ने अपनी जान बचाने के लिए ‘घर वापसी’ का ही रास्ता अपनाया।

 

गुजरात में भी उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के श्रमिक रहते हैं। देश भर में श्रमिकों की कष्टदायक पदयात्रा के दृश्यों के बीच गुजरात सरकार और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने संवेदनशील रवैया अपनाया। अन्य राज्यों के श्रमिकों की सुरक्षित तथा सकुशल ‘घर वापसी’ का ऐसा कष्ट रहित व संतोषपूर्ण प्रबंध किया, जिसके चलते गुजरात से ‘घर वापसी’ कर रहे हर श्रमिक के चेहरे पर मुस्कान थी और लौट कर आने की ललक भी थी।

 

चूँकि गुजरात एक औद्योगिक और व्यावसायिक राज्य है और श्रमिक ही गुजरात के विकास व गुजरात की प्रगति के मूल आधार हैं। इसी कारण मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अब ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला है, जिससे गुजरात से ‘घर वापसी’ कर चुके लाखों श्रमिकों की गुजरात वापसी का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। गुजरात और रूपाणी यह भली-भाँति समझते हैं कि श्रमिक ही राष्ट्र निर्माता है।  गुजरात का भी कर्णधार है। इसलिए विजय रूपाणी ने गत 4 जून को जो 14,022 करोड़ रुपए का आत्मनिर्भर गुजरात आर्थिक पैकेज घोषित किया, उसमें सर्वाधिक फोकस राज्य के श्रमिकों, स्थानीय व आदिवासी श्रमिकों तथा ठेला आदि चला कर रोज़ी-रोटी कमाने वाले निर्धन वर्गों पर ही रहा।

 

अब ‘दूसरा’ नहीं, ‘पहला’ घर बनेगा गुजरात 

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कोविड 19 और लॉकडाउन के कारण संकटों से जूझ रहे समाज के सभी क्षेत्रों के लिए 14,022 करोड़ रुपए का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया, परंतु इस पैकेज में रूपाणी की यह आंतरिक संवेदना स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आई कि अन्य राज्यों से गुजरात में मज़दूरी करने आने वाले श्रमिक अब गुजरात को ‘दूसरा’ नहीं, वरन् ‘पहला’ घर बना लें। यही कारण है कि इस पैकेज में 1000 करोड़ रुपए अफॉर्डेबल मकानों के निर्माण के लिए आवंटित किए गए। राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों में गति लाने के लिए 1 लाख 60 हज़ार अफॉर्डेबल मकानों का निर्माण करेगी तथा इसके लिए 1000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देगी, ताकि श्रमिकों को सस्ते दाम पर ‘अपना घर’ बनाने का अवसर मिले। इस घोषणा का सर्वाधिक लाभ ग़रीब एवं श्रमिक वर्ग के लोगों को होगा, जिनमें अधिकांश अन्य राज्यों से गुजरात में कमाई एवं मज़दूरी के लिए आते हैं। मज़दूरों को ये मकान सस्ते दाम पर दिए जाएँगे। इसमें भी जब अन्य राज्यों के मज़दूरों को गुजरात में ही सस्ता घर मिल जाएगा, तो वे कोरोना सहित किसी भी विकट स्थिति में ‘घर वापसी’ के लिए विवश नहीं होगा।

 

मज़दूरों को अपना बना कर बनाया जाएगा ‘आत्मनिर्भर गुजरात’ 

विजय रूपाणी ने जो पैकेज घोषित किया, उसके अनुसार राज्य सरकार अन्य राज्यों के श्रमिकों के लिए गुजरात में ही सस्ती कीमत पर मकान उपलब्ध कराएगी। किसी राज्य विशेष का नाम न लिखते हुए कहा जा सकता है कि कई राज्यों में अन्य राज्यों के श्रमिकों के साथ ‘परायापन’ एवं ‘सौतेला’ व्यवहार तक किया गया, परंतु गुजरात की अपनी औद्योगिक, व्यावसायिक एवं मानवीय संवेदना से परिपूर्ण संस्कृति है, जिसके चलते गुजरात ने कभी भी अन्य राज्यों के लोगों से कोई भेदभाव नहीं किया और कोरोना संकट के दौरान एकमात्र गुजरात ही ऐसा राज्य बन कर उभरा, जिसने अन्य राज्यों के श्रमिकों को ‘घर वापसी’ करते समय भावुक होने पर विवश कर दिया। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने आत्मनिर्भर गुजरात पैकेज में अन्य राज्यों के श्रमिकों के लिए 1.60 लाख किफायती मकान बनाने तथा 1000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देने की घोषणा करके स्पष्ट संदेश दिया कि गुजरात न केवल गुजरात के ग़रीबों-श्रमिकों, अपितु अन्य राज्यों के ग़रीब श्रमिकों को भी ‘अपना’ मानता है और उन सबके आधार पर ‘आत्मनिर्भर गुजरात’ बनना चाहता है।

 

स्थानीय आदिवासी श्रमिकों को भी मिलेगी स्थिरता 

आत्मनिर्भर गुजरात आर्थिक पैकेज में गुजरात सरकार ने स्थानीय आदिवासी श्रमिकों के लिए भी 350 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इस प्रावधान के अंतर्गत आदिवासी श्रमिकों को अपने गाँव में पक्का घर बनाने के लिए 35000 रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। गुजरात में कई ऐसे उद्योग-कारोबार हैं, जो आदिवासी क्षेत्रों के आसपास हैं। इन स्थानों पर आदिवासी श्रमिक मज़दूरी के लिए जाते हैं। स्थानीय होने के कारण उन्हें रोज़गार देने में प्राथमिकता दी जाती है। इन आदिवासी श्रमिकों के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं होता। कई आदिवासी श्रमिक रोज़गार के लिए अन्य जिलों में भी जाते हैं। रूपाणी ने सभी प्रकार के आदिवासी श्रमिकों के लिए पक्का घर बनाने की जो घोषणा की है, उससे घूमंतू आदिवासी श्रमिकों एवं उनके परिवारों को स्थायी स्थायित्व मिलेगा।

 

निर्धन वर्ग के सभी लोगों पर जम कर रीझे रूपाणी 

विजय रूपाणी ने 14,022 करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर गुजरात पैकेज में नि:संदेह छोटे-बड़े उद्योगों, कारोबारों, दुकानदारों, मध्यम वर्ग के आम लोगों के लिए अनेक घोषणाएँ कीं, परंतु अधिकांश घोषणाओं से निर्धन वर्ग के श्रमिकों सहित सभी लोगों को अधिक लाभ होगा। पैकेज में जहाँ श्रमिकों के लिए अफॉर्डेबल मकान, स्थानीय आदिवासियों के लिए पक्के मकान की सब्सिडी जैसे प्रावधान हैं, वहीं श्रमिकों-ग़रीबों को ढाई लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ठेले वालों, फल-सब्जी वालों को बरसात के मौसम में बड़ी साइज़ की छतरी देने के लिए 10 करोड़ रुपए दिए जाएँगे। अहमदाबाद, सूरत और राजकोट के श्रमिकों को श्रमिक नुक्कड़ों से तथा कार्य स्थल पर सिटी बस से पहुँचाने के लिए 50 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों की पत्नी और महिला श्रमिकों को 2 बच्चों तक प्रसूति सहायता के रूप में 6 करोड़ रुपए, ग़रीब परिवारों को मुफ्त अनाज, परिवारों को बैंक खाते में डीबीटी से 1000 रुपए का भुगतान, वृद्ध सहायता पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन के अग्रिम भुगतान के लिए पैकेज में 7374.67 करोड़ रुपए जारी किए जाएंगे।