कोरोना गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए सुनी ‘‘मन की बात’’
जयपुर, 28 जून। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘‘मन की बात’’ कार्यक्रम के जरिए देश को सम्बोधित किया। उन्होंने 15 जून को गलवान में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख में भारत की भूमि पर आँख उठाकर देखने वालों को करारा जवाब मिला। हमें दोस्ती निभाना और आँखों में आँखें डालकर जवाब देना आता है। मोदी ने अपने कार्यक्रम में जवानों की शहादत, कोरोना दौर, आत्मनिर्भर भारत, किसान, लाॅकडाउन की कहानियां और मानसून में पानी बचाने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की।


प्रदेश में भी आमजन ने कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए ‘‘मन की बात’’ सुनी। भाजपा राजस्थान ‘‘मन की बात’’ प्रदेश प्रमुख चम्पालाल रामावत ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने चूरू में, प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर ने झोटवाड़ा में कार्यकर्ताओं के साथ ‘‘मन की बात’’ सुनी। इसी तरह भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री वी. सतीश ने कार्यालय स्टाफ के साथ में ‘‘मन की बात’’ सुनी।


इस बार मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों पर जिक्र किया:-
1. 2020 ने आधा सफर पूरा कर लिया है। हर तरफ वैश्विक महामारी की ही बात हो रही है। हर कोई एक ही विषय पर चर्चा कर रहा है कि यह साल जल्दी क्यों नहीं बीत रहा, यह बीमारी कब खत्म होगी। कोई कह रहा है, 2020 शुभ नहीं है। कभी कभी सोचता हूँ कि ऐसा क्यों हो रहा है? संकट आते रहे, लेकिन सभी बाधाओं को दूर करते हुए नए सृजन किए गए। हमारा देश आगे बढ़ता रहा। भारत ने संकट को सफलता की सीढ़ी में परिवर्तित किया है। आप इसी संकल्प से आगे बढ़ेंगे तो यही साल कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुझे 130 करोड़ लोगों की शक्तियों पर भरोसा है।


2. दुनिया ने इस दौरान भारत की विश्वबंधुत्व की भावना को भी महसूस किया है। हमने अपने सीमाओं की सुरक्षा करने वालों को जवाब भी दिया। भारत मित्रता निभाना जानता है तो आँखों में आँखे मिलाकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है। अपने वीर सपूतों के परिवारों के मन में जो जज्बा है, उन पर देश को गर्व है। लद्दाख में हमारे जो वीर जवान शहीद हुए हैं, उनके शौर्य को पूरा देश नमन कर रहा है, श्रद्धांजलि दे रहा है। पूरा देश उनका कृतज्ञ है, उनके सामने नत-मस्तक है। इन साथियों के परिवारों की तरह ही, हर भारतीय, इन्हें खोने का दर्द भी अनुभव कर रहा है।


3. आजादी के पहले हमारा देश डिफेंस सेक्टर में दुनिया के कई देशों से आगे था। उस समय कई देश जो हमसे कहीं पीछे थे वे आज आगे हैं। हमें अपने पुराने अनुभवों को लाभ उठाना चाहिए था वह हम नहीं उठा सके। आज भारत प्रयास कर रहा है। आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। कोई भी विजन सबके सहयोग के बिना नहीं हो सकता। लोकल के लिए वोकल होंगे तो यह भी देशसेवा ही होगी। 


4. कृषि में भी दशकों से लाॅकडाउन में फंसी थीं, इसे भी अनलाॅक कर दिया गया है। इससे किसानों को अपनी फसलें किसी को भी कहीं भी बेचने की आजादी मिली है। इसके साथ ही उन्हें अधिक ऋण मिलना भी सुनिश्चित हुआ है। देशवासियों हर महीने हम ऐसी खबरें पढ़ती हैं जो हमें भावुक कर देती हैं। बताती हैं कि हर भारतीय लोगों की मदद करने में जुटा है।

 
5. अरुणाचल के सियाम गांव में लोगों ने गाँव के बाहर 14 अस्थायी झोपड़ियां बना दीं और तय किया कि बाहर से आने वाले 14 दिन इन्हीं झोपड़ियों में रहना होगा। उन्हें सभी जरूरत की चीजें उपलब्ध कराई गईं। जैसे कपूर आग में तपने पर भी अपनी सुगंध नहीं छोड़ता, ऐसे ही आपदा में अच्छे लोग अपने गुण नहीं छोड़ते। हमारे श्रमिक साथी भी इसका जीता-जागता उदाहरण है। हमारे प्रवासी श्रमिकों की ऐसी ही कहानियां आ रही हैं। ऐसे ही कुछ श्रमिक साथियों ने कल्याणी नदी का उद्धार करना शुरू किया। ऐसी लाखों किस्सें कहानियां हैं जो हम तक नहीं पहुँच पाई हैं। आपके आसपास ऐसी घटनाएं हुई हों तो मुझे लिखें। यह लोगों को प्रेरणा देंगी। 


6. कोरोना की वजह से कई लोगों ने मानसिक तनाव जिंदगी गुजारी। वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि कैसे उन्होंने इस दौरान छोटे-छोटे पलों को परिवारों के साथ बिताया। मेरे नन्हें साथियों से भी मैं आग्रह करना चाहता हूँ। एक काम कीजिए, माता-पिता से पूछकर मोबाइल उठाइए और दादा-दादी और नाना-नानी का इंटरव्यू कीजिए। पूछिए, उनका बचपन में रहन-सहन कैसा था, क्या खेलते थे, मामा के घर जाते थे, त्योहार कैसे मनाते थे। उन्हें 40-50 साल पीछे जिंदगी में जाना आनंद देगा और आपको तब की चीजें सीखने को मिलेंगी और परिवार के लिए एक अच्छा अमूल्य खजाना और वीडियो एलबम भी बन जाएगा। 


7. देश के एक बड़े हिस्से में मानसून पहुँच चुका है। इस बार मौसम वैज्ञानिक भी मानसून को लेकर उत्साहित हैं। अच्छी बारिश होगी तो प्रकृति प्रफुल्लित होगी, किसान भी खुश होंगे। इससे प्रकृति रीफिलिंग करती है। इसमें हमारा थोड़ा प्रयास काफी मददगार होगा। कर्नाटक के कामेगौड़ा जी बहुत असाधारण काम किया है। वे अपने जानवर चराते हैं और आसपास छोटे-छोटे तालाब बनाने में जुटे हैं। अब तक वे 16 तालाब अपनी मेहनत से खोद चुके हैं। हो सकता है कि ये तालाब बहुत छोटे हों, लेकिन उनका यह प्रयास बहुत बड़ा है।