क्या ऑनलाइन शिक्षा होगी कारगर, कोरोना से बदली शिक्षण पद्धति
बेहतर कल की और देखना इंसान का स्वभाव है इसलिए हम सभी ऊंची उम्मीदों व आकांक्षाओं के साथ अपनी स्वप्निल मंजिल निर्धारित करते हैं । समय-समय पर जीवन एवं संसार में परिवर्तन होते रहते हैं । संसार  परिवर्तनशील है , जो व्यक्ति परिवर्तन को स्वीकार करने को तैयार रहता है , वही भय रहित जीवन जी सकता है । वर्तमान वैश्विक महामारी के प्रकोप ने जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है, शिक्षा भी इससे अछूता नहीं है । इस दौर में शिक्षा के क्षेत्र में एक तरफ जहां विभिन्न प्रकार की चुनौतियां खड़ी हैं वहीं उन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न प्रयोग भी हो रहे हैं । देश में लोक डाउन के बाद, अनलॉकिंग का दौर शुरू हो गया है, शैक्षिक संस्थानों में स्टाफ आना शुरू हो गया है। अगले माह से एजुकेशनल इंस्टिट्यूट भी शुरू हो सकते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्कूल - कॉलेज सहित शैक्षणिक संस्थानों को खोलने की गाइडलाइन तैयार कर रहा है। एचआरडी मंत्री ने मीडिया के माध्यम से सूचित किया कि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगस्त माह बाद स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ की जा सकती हैं। 

 

कोविड -19 के बाद क्लास रूम का बदला हुआ रूप नजर आएगा। परिवर्तित शैक्षिक जगत अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है इसके बावजूद यह  कोशिश हो रही है कि अकादमिक कैलेंडर किसी भी प्रकार सार्थक परणिती तक पहुंच सके जिस के क्रम में शिक्षाविद् और छात्र ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए घर में पठन-पाठन हेतु समय का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। नि:संदेह प्रौद्योगिकी संकटकाल में मददगार साबित हुई है मगर हमारे समाज की विसंगतियां और भौगोलिक बाधाएं इसमें व्यवधान उत्पन्न करती है जिसके चलते शत-प्रतिशत परिणाम हासिल करना असंभव है। वजह यह है कि विद्यार्थियों का एक वर्ग ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ उठाने में असमर्थ है। बड़ी वजह यह है कि अधिकांश छात्रों के घरों में ऑनलाइन पढ़ाई में सहायक उपकरण उपलब्ध नहीं है खासकर कमजोर वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के पास लैपटॉप ,कंप्यूटर या स्मार्टफोन नहीं है, कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा बाधित है जिसके चलते ऑनलाइन पढ़ाई की सार्थकता स्थापित नहीं हो सकती है। इससे जुड़ी सामाजिक विसंगतियां हैं हमें छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए सोचने की जरूरत है ताकि सभी को समान अवसर मिले।

 

शिक्षा प्राप्त करने की सबसे मजबूत व्यवस्था है अध्यापक और विद्यार्थी का व्यक्तिगत संबंध जो कि कक्षा में ही उचित तरीके से विकसित हो पाता है। कक्षा का स्वभाविक वातावरण बच्चों को मानसिक तौर पर आगे बढ़ने पर सहयोग करता है हालांकि ऑनलाइन शिक्षण ने बहुत कुछ करने की क्षमता भी दी है लेकिन बुनियादी ढांचे की तमाम कमियों के कारण इसकी पहुंच और क्षमता पर सवाल भी उठ रहे हैं । मसलन देश भर में इंटरनेट की पहुंच और नेटवर्क की जैसी हालत है इसमें ऑनलाइन शिक्षा का दायरा कितना व्यापक हो सकता है ? यह विचारणीय प्रश्न है दरअसल ऑनलाइन शिक्षा के महत्वाकांक्षी प्रारूप में सबसे बड़ी बाधा अधिकतर आबादी के पास जरूरी संसाधनों की अनुपलब्धता है । शिक्षा को सर्वसुलभ बना देना एक कल्याणकारी कदम है, लेकिन इन संसाधनों का ठीक तरह से प्रयोग तभी संभव है जब इसकी पहुंच सभी जरूरतमंदों तक हो। ऑनलाइन के प्रयोग में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संपर्क के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था जरूर दे दी है लेकिन इसमें विशाल स्तर पर भेदभाव पैदा होने की पूरी संभावना है। फिलहाल दुनिया एक भय के सागर में डूबी हुई है सामान्य मानवीय गतिविधियां फिर से सहज होने के इंतजार में है और सब कुछ , ठहरे होने की स्थिति में शिक्षा की तस्वीर भी तकलीफ देह है । ऑनलाइन शिक्षा का भी हलांकी अपना अलग ही महत्व है किंतु ऑनलाइन शिक्षा आदर्श नहीं कही जा सकती। गुरु के सानिध्य में छात्र का शिक्षा के साथ-साथ चरित्र और व्यक्तित्व का निर्धारण होता रहा है जो ऑनलाइन संभव  ही नहीं।

 

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एचआरडी मंत्री को पत्र लिखकर सुझाव भी दिया है कि स्कूलों को उचित सुरक्षा उपायों के साथ खोलना ही बेहतर कदम होगा। पत्र में लिखा गया कि केवल ऑनलाइन क्लास से शिक्षा आगे नहीं बढ़ सकती , केवल बड़े बच्चों को स्कूल बुलाना और छोटे बच्चों को अभी घर में ही रखने से भी शिक्षा को आगे बढ़ाना असंभव होगा। पत्र में सिसोदिया ने सेकेंडरी सीनियर सेकेंडरी  ग्रेड की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के सुझाव दिए हैं । उन्होंने पत्र में लिखा है कि छात्रों को सिलेबस आधारित रटंत परीक्षा के चंगुल से मुक्त कराएं । 

 

जहां एक और पूरा विश्व वैश्विक महामारी से त्रस्त है और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जानकारों  का मानना है कि जुलाई और अगस्त माह में कोरोना संक्रमण पूरे पीक पर होगा वहीं दूसरी ओर कोटा की लाइफलाइन कही जाने वाली कोचिंग इंडस्ट्री को शुरू कराने के लिए पूरे व्यवसाई सामूहिक रूप से एक मंच पर आकर ज्ञापन दे रहे हैं। आकांक्षाओं से घबराए व्यापारियों ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपकर सभी कोचिंगों को शीघ्र पुनः शुरू कराने का निवेदन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से किया है।