निर्दोष डॉक्टर्स और नर्सिंग कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जाना गलत : अध्यक्ष अरिस्दा
सीकर। अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने जयपुर के महिला चिकित्सालय में पूर्व वार्ड प्रतिनिधी प्रसव के दौरान मृत्यु होने पर बिना जांच के रेजिडेंट चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों को एपीओ किए जाने का घोर विरोध करते हुए कहा कि चिकित्सालय में यूनिट प्रभारी रेजिडेंट और नर्सिंग कर्मियों से पहले जवाबदेह होता है।

 

सच्चाई तो यह है कि कोई चिकित्सक यह सोच भी नहीं सकता कि उसका कोई मरीज़ इलाज के दौरान ईश्वरीय शरण मे चला जाए यह जो भी हुआ उसके लिए संवेदना! यह हम सब के लिए भी पीड़ादायक है। यह घटना मेडिकल कॉलेज से सम्बंधित चिकित्सालय में घटित हुई है।  जहां सेवारत चिकित्सक एवं रेजिडेंट चिकित्सकों को यूनिट प्रभारी के निर्देशन में ही कार्य करना होता है। लेकिन इनकी कोई जिम्मेदारी निश्चित न करते हुए उनके अधीनस्थ चिकित्सकों को ही दोषी मान लेना सरासर अन्याय है। अरिस्दा इसका कड़ा विरोध करता है। यूनिट प्रभारी चिकित्सा शिक्षक होते हैं, लेकिन खेद का विषय है कि इस दुर्घटना के लिए किसी भी यूनिट प्रभारी को जिम्मेदार नहीं माना गया। उन्होंने इस कार्यवाही को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। 

डॉ चौधरी ने कहा कि एक तरफ चिकित्सा शिक्षक अपनी रिटायरमेंट आयु ७० वर्ष तक बढ़ाने के लिए लॉबिंग कर रहें हैं,दूसरी ओर अपनी उम्र का हवाला देकर कोविड वार्डों में जाने से इंकार कर रहे हैं। युवाओं के हितों पर कुठाराघात करने वाली इस मानसिकता को भी हास्यास्पद बताते हुए शासन से इसको ज़मीनी स्तर पर वास्तविकता की जाँच करने का आग्रह किया है और ६२ वर्ष से अधिक आयु वाले वृद्ध मेडिकल शिक्षकों के आचरण पर खेद जताया। 

 

डॉ चौधरी ने कहा कि अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा ) इस घटना, दुर्घटना अथवा कोताही पर निष्पक्ष न्यायिक जाँच की माँग करता है ताकि सच सबके सामने आए,,लीपापोती करने के बजाय पता लगाया जाए की कौन ज़िम्मेदार है ! दोषी बेनक़ाब होने चाहिए,और निर्दोष चिकित्सकों के साथ न्याय होना चाहिए ।

 

गौरतलब है कि जहां एक ओर कोविड महामारी से लड़ने में चिकित्सकों को सम्मान दिया जा रहा है,वहीं दूसरी ओर निर्दोष चिकित्सकों को बिना दोष साबित किए ही दण्डित कर उनका मनोबल तोड़ने और भविष्य में कैरियर खराब करने जैसी घटनाएं घटित होना निंदनीय और सोचनीय है। डॉ चौधरी ने कहा कि यदि तुरंत प्रभाव से इन दमनकारी आदेशों को वापस नहीं लिया गया तो न चाहते हुए भी संघ को कड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा । सेवारत चिकित्सक इस महामारी के दौरान किसी प्रकार का आन्दोलन नहीं चाहते ,और इसीलिए धैर्य और संयम रखें हुए हैं