राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के योग विशेषज्ञ ने कोरोना से लड़ने में प्राणायाम का महत्त्व बताया

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सिलसिले में विशेष वेबीनार आयोजित


जयपुर। आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में पत्र सूचना कार्यालय, जयपुर ने आज विशेष वेबीनार का आयोजन किया। इस वेबीनार में प्रतिभागियों को कोरोना संकटकाल में योगाभ्यास और प्राणायाम करके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के बारे में बताया गया।


कोरोना महामारी से बचाव के लिए योग व प्राणायाम की महत्ता' विषय पर आयोजित इस सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान, जयपुर के स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग के प्रमुख डॉ. कमलेश कुमार शर्मा ने कहा कि दुनिया के बाकी देशों की तुलना में भारत में कोरोना महामारी के पीड़ितों के ठीक होने की दर ज्यादा होने का कारण हमारे जीन में योग व प्राणायाम का शामिल होना है।


उन्होंने कहा कि योग प्राचीन समय से हमारे देश की सभ्यता का हिस्सा रहा है और यही कारण है कि हमारे शरीर के जीन में उसका असर है। इसीलिए जरूरी है कि हम योग व प्राणायाम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं ताकि अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर हम कोरोना ही नहीं बल्कि अन्य बीमारियों को भी अपने शरीर से दूर रख सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें।


सत्र की शुरुआत में अपर महानिदेशक (रीजन) डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के परिप्रेक्ष्य में इस वेबीनार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सभी को अपने जीवन में योग और प्राणायाम को शामिल करना चाहिए क्योंकि यह आपके तन और मन दोनों को स्वस्थ एवं संतुलित रखता है।


वेबीनार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के जयपुर इकाइयों के अलावा राजस्थान के अलग-अलग शहरों में मौजूद इकाइयों के 30 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।


डॉ. शर्मा ने इस सत्र में प्रतिभागियों से अनुलोम—विलोम, कपाल भाति, भस्त्रिका और भ्रामरी प्राणायाम के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की और उनकी सहयोगी डॉ. किरन शर्मा ने प्रतिभागियों को प्राणायाम करके दिखाया। प्राणायाम के लाभ बताने के बाद विभिन्न प्रतिभागियों ने इससे जुड़े सवाल पूछे जिनका जवाब डॉ. शर्मा ने विस्तार से दिया।


साथ ही डॉ. शर्मा ने स्वस्थ जीवन में प्रकृति के योगदान को समझाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारे शरीर को फेफड़े आक्सीजन देते हैं उसी प्रकार से पेड़—पौधे प्रकृति के फेफड़े होते हैं। इसलिए हम सभी को पौधे लगाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए ताकि हमें पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन मिल सके।