लव जिहाद पर कहर


- राजेंद्र राज -

    उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से सांसद है एसटी हसन। पेशे से चिकित्सक हसन अपने नर्सिंग होम में मात्र ₹30 में  रोगियों को सेवा देते रहे हैं। मुरादाबाद के मेयर रहे हसन की इलाके में अच्छी पकड़ है। इस कारण ही पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को न चाहते हुए भी हसन को टिकट देना पड़ा। चर्चा में रहने वाले हसन पिछले दिनों फिर सुर्खियों आए। इस बार उन्होंने लव जिहाद के विरुद्ध उत्तर प्रदेश में बने कानून पर चौंकाने वाला बयान दिया। उनके बयान से लगता है, भाजपा सरकार का तीर निशाने पर लगा है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जो संदेश अपने वोट बैंक को देना चाहते है,  हसन के बयान ने जैसे उन्हें मुंह मांगी मुराद दे दी है।

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद की भयावहता किस चरम पर होगी। इसकी झलक हसन के बयान में नजर होती है। उन्होंने बड़ी स्पष्टता से मुसलमान लड़कों को सावचेत किया है कि वे किसी भ्रम में नहीं रहे। उनका भला इसी में है कि वे  " हिंदू लड़कियों को बहन समझे। किसी के बहकावे में नहीं आएं। ये ऐसा कानून बना दिया गया है । जिससे उन्हें टार्चर किया जा सकता है। अपनी जिंदगी बचाएं। किसी लव के चक्कर में ना पड़े।" 

 

    हसन के बयान से दो पहलू उजागर होते हैं। पहला, कि मुसलमान युवक बहक रहे थे और उन्हें कोई बरगला रहा था।  जाने या अनजाने वे उस मुहिम का हिस्सा बन रहे थे। जिसके पीछे कट्टरपंथियों की ऐसी मानसिकता काम करती है कि लड़ के लिया पाकिस्तान, हंस के लेंगे हिंदुस्तान। आतंकवाद और अन्य तरीकों से जब ऐसे मंसूबे सफल नहीं हुए। तब संख्या-बल से सत्ता पर काबिज करने की योजना को अमल में लाया गया। इस योजना के तहत अधिक से अधिक संतान उत्पत्ति कर क्षेत्र की जनसंख्यां का भूगोल बदलने की कोशिश की गई। इस कुत्सित प्रयास के पीछे ही लव जिहाद की मानसिकता काम करती है।

       

      मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से सांसद हसन के बयान का दूसरा पहलू यह सोचने को बाध्य करता है कि उत्तर प्रदेश सरकार के बनाए कानून की मारक क्षमता बेहत व्यापक है। जिसने लव जिहाद के अलंबरदारों के मंसूबों को धराशाई कर दिया है।


  योगी सरकार ने हाल ही शादी के लिए धर्मांतरण पर रोक लगाने के मकसद से उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 जारी किया है। इस कानून से उत्तर प्रदेश समेत देश की राजनीति में उबाल आ गया है। इससे देश में एक बार फिर से लव जिहाद को लेकर बहस छिड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश ने भी इसी तरह का कानून बना दिया है। कुछ अन्य राज्य भी लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने की तैयारी में है। इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इसके खिलाफ अपनी राय व्यक्त की है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ऐसे कानून को समाज को तोड़ने वाला और सद्भाव बिगाड़ने वाला बताया है।


 भारतीय जनता पार्टी इस कानून के जरिए अपने वोट बैंक को मजबूत करने में सफल नजर आ रही है। वहीं, जिहादी सोच के मुस्लिमों में भय पैदा हो गया है। दरअसल लव जिहाद एक बेहद गंभीर सामाजिक समस्या के तौर पर उभर कर सामने आ रहा है। इसका फायदा आपराधिक मनोवृत्ति के लोग उठा रहे हैं। धोखा देकर लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाना और फिर शादी के लिए लड़की का धर्मांतरण करवाना ही लव जिहाद के मूल में है। नाम बदलकर, कलावा पहनकर, मंदिर  जाकर हिंदू लड़कियों को बरगलाने का जो अभियान उत्तर भारत में  चल रहा था। निसंदेह इस कानून से उस पर रोक लगेगी। सांसद हसन का बयान इसकी पुष्टि करता है।

हालांकि, लव जिहाद शब्द  केरल राज्य में गढ़ा गया था। वहां के ईसाई समाज ने इस मामले को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार और प्रशासन को अवगत कराया कि मुस्लिम समाज के लोग उनके समाज की लड़कियों को अभियान चलाकर धर्मांतरण के लिए विवश कर रहे हैं। बाद में कर्नाटक में भी लव जिहाद को लेकर सवाल खड़े किए गए। तब से यह मामला देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर भारत में इसने जोर पकड़ा। हिंदूवादी संगठन काफी समय से लव-जिहाद के खिलाफ कठोर कानून बनाने का भाजपा सरकारों पर दबाव डाल रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने पहल कर इसके खिलाफ कानून बनाया है। वक्त बताएगा यह कानून लव जिहाद पर कितना कहर बरपाता है।


लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।