नारायण बारेठ की नियुक्ति क्यों खास हैं: राजेन्द्र बोड़ा



जयपुर। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और राजस्थान पत्रकार संघ के पूर्व महामंत्री नारायण बारेठ अपनी सरल और सहज भाषा मे बहुत कुछ कहे जाने के लिए जाने जाते हैं। 

उन्हें हाल ही में राज्य सूचना आयुक्त बनाया गया है। प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र बोड़ा की नज़रों में नारायण बारेठ की नियुक्ति क्यों खास हैं।

वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ को राज्य सूचना आयोग का सदस्य बनाया गया है। एक पत्रकार से अधिक सूचना की अहमियत और कौन जान सकता है। पत्रकार का तो पेशा ही सूचना जुटाना और उसे सरल भाषा में समझाते हुए उसे आम जन तक पहुंचाना होता है। इसलिए बारेठ का सूचना आयुक्त बनना जनता के सूचना के अधिकार की रखवाली आश्वस्त करता है। उनको राज्यपाल ने पद की शपथ दिलाई।


बारेठ का यह पद संभालना सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वे अनुभवी पत्रकार हैं बल्कि इसलिए भी कि वे इस अधिकार को पाने की किसान मजदूर शक्ति संगठन की मुहिम से शुरू से ही जुड़े रहे हैं, केवल पत्रकार के नाते ही नहीं बल्कि सक्रिय वैचारिक जुड़ाव के साथ। इसलिए उन्हें मालूम है कि जनता को यह अधिकार कितने लंबे संघर्ष के बाद मिला। संघर्ष से निकले हुए किसी व्यक्ति के पास उस अधिकार की रक्षा का ही दायित्व आ जाय जिसके लिए लड़ाई लड़ी गई तब आम जन स्वाभिक ही निश्चिंत हो सकता है कि उसके हित सुरक्षित हैं। आशा की जा सकती है कि सूचना नहीं देने वाले शासकीय अधिकारियों की कारगुजारियां वे नहीं चलने देंगे तथा ऐसों के खिलाफ आयोग में आने वाली अपीलों को उसी दृष्टि से निपटाएंगे।


बारेठ की सबसे बड़ी खूबी उनकी पैनी दृष्टि और व्यवहारिकता है। उनका लहजा ऐसा है जिसमें वे कठोर बात भी हंसी-ठिठोली में सहज रूप से कह जाते हैं। अपने ऐसे व्यवहार से वे किसी को नाराज़ भी नहीं करते मगर अपनी बात दृढ़ता से कह जाते हैं। आयोग में वे अन्य सदस्यों तथा मुख्य सूचना आयुक्त के साथ काम करेंगे तब भी उनका यह लहजा उन्हें सबके लिए स्वीकार्य बनाएगा। अपने पत्रकारिता के लंबे अनुभवों में से एक अनुभव का साझा करते हुए उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर टिप्पणी की - सदां ही गद्द ! यानि हमेशा इक्क्ठा रहेंगे। वे कहते हैं यह छोटा सा वाक्य दुनिया की सबसे पुरानी तहजीब का हिस्सा है। सिंध में जब भी लोग परस्पर मिलते है और जिंदगी के सफर की डगर पर फिर निकल पड़ते है तो कहते है - सदां ही गद्द ! आशा की जाती है कि वे जन अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध कर पाएंगे।


यह किसी पत्रकार की सूचना आयोग में पहली नियुक्ति नहीं है। उनसे पहले पत्रकार आशुतोष शर्मा आयोग के सदस्य बन चुके हैं और उन्होंने इसके प्रभारी प्रमुख रहते हुए हाल ही में अपना कार्यकाल पूरा किया है।